ब्लॉगसेतु

अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”  भारत के आज जन-जन  फूले नहीं समातेभारत के आज कण-कण  फूले नहीं समातेभारत का कोना-कोना  है  आज जगमगायागणतंत्र  पर्व  आया  ,  गणतंत्र  पर्व आया.माँ हिंद के जलधि ने  पावन चरण पखारेमंडर...
अरुण कुमार निगम
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जनकवि स्व.कोदूराम “दलित”गरीबी ! तू न यहाँ से जाएक बात मेरी सुन ,पगलीबैठ यहाँ पर आ,गरीबी तू न यहाँ से जा.....चली जायेगी तू यदि तो दीनों के दिन फिर जायेंगेमजदूर-किसान सुखी बनकर गुलछर्रे खूब उड़ायेंगेफिर कौन करेगा पूँजीपतियों ,की इतनी परवाहगरीबी तू न यहाँ से जा.....ब...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”               दोहा जय-जय अमर शहीद जय, सुख-सुराज-तरु-मूलतुम्हें  चढ़ाते  आज हम ,  श्रद्धा  के  दो फूल.उद्धारक माँ - हिंद के, जन - नायक, सुख-धामविश्व...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”गो-वध बंद करो जल्दी अब, गो-वध बंद करोभाई ! इस स्वतंत्र भारत में, गो-वध बंद करो.महापुरुष उस बाल कृष्ण का, याद करो तुम गोचारणनाम पड़ा गोपाल कृष्ण का, याद करो तुम किस कारणमाखन-चोर उसे कहते हो, याद करो तुम किस कारणजग-सिर-मौर उसे कहते हो, याद...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”पराधीन रहकर सरकस का शेर नित्य खाता है कोड़ेपराधीन रहकर बेचारेबोझा ढोते हाथी-घोड़े.माता – पिता छुड़ा, पिंजरे मेंरखा गया नन्हा –सा तोतावह स्वतंत्र उड़ते तोतों कोदेख सदा मन ही मन रोता.चाहे पशु हो, चाहे पंछीपरवशता कब , किसको भायीकहने का मतलब यह...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”जो अपने सारे सुख तज करजन-हित करने में जुट जावेंदूर विषमतायें कर - कर केजो  समाज में समता लावेंजन-जागरण ध्येय रख अपनाघर-घर जाकर अलख जगावेंउनके अनुगामी बन कर हमराह उन्हीं की चलते जावें.लहू-पसीना औंटा करकेखेतों में अनाज उपजावेंजो खदान-का...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”सरल, सुबोध, सरस, अति सुंदर, लगती प्यारी-प्यारी हैदेवनागरी लिपि जिसकी, सारी लिपियों से न्यारी है.ऋषि-प्रणीत संस्कृत भाषा, जिस भाषा की महतारी हैवह हिंदी भाषा भारत के लिये परम-हितकारी है.सहती आई जो सदियों से, संकट भारी-भारी हैजीवित रही किंतु...
अरुण कुमार निगम
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-जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित” गुरु, पितु, मातु, सुजन,भगवान,  ये पाँचों हैं पूज्य महानगुरु  का  है  सर्वोच्च  स्थान , गुरु है सकल गुणों की खान.कर अज्ञान तिमिर का नाश,  दिखलाता यह ज्ञान-प्रकाशरखता  गुरु  को  सदा  ...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”  कवि पैदा होकर आता है होती कवियों की खान नहींकविता करना आसान नहीं.कविता कर सके सूर तब , जब अपनी दोनों आँखें फोड़ीकविता कर सके संत तुलसी , जब अपनी प्रिय रत्ना छोड़ीकविता कर सके कबीर कि जब झीनी-झीनी चादर ओढ़ीदे गये जगत को अमर काव्य , जब...