ब्लॉगसेतु

Juban-ए- दास्तां
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आखिर कब तक मुझे यूं ही नफरत करोगे।मिट्टी में मिलने के बाद तो एक दिन तुम याद करोगे।आखिर कब तकअपने दिल की धड़कनों से मुझे दूर करोगे।सांसे रुक जाने के बाद तोअपनी धड़कनों में तोएक दिन मुझे सुनोगे।आखिर कब तक मेरे दर्द पर मुस्कुराओ गए।बेदर्द दुनिया से दर्द मिलने परएक दिन...
Juban-ए- दास्तां
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इंसान कमल फूल की तरह जियोंक्योंकि-कमल फूल कीचड़ में खिलता है,लेकिन सभी इंसान  उसे चाहने लगती है;इसलिए कि अपने दु:ख में रहता है दुसरे के उपयोग में आता है ।इंसान यदि बनना है कमल फूल की तरह बनोंअपने लाख दु:ख में भी दुसरे की उपहार सेमत भागों,तब तो इंसान कमल फूल की...
Juban-ए- दास्तां
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अपनों का ये कैसा मंज़र देख रहा हूँ,मैं आज रिश्तों को बिखरता देख रहा हूँ।जिनके आँगन में गूंजती थी कभी,मेरे बचपन की किलकारियां,वहां आज अपनी जवानी को सिसकता देख रहा हूँ,मैं आज रिश्तों को बिखरता देख रहा हूँ।कभी था जिस घर में वो मंज़र प्यार का,आज उन्ही के हाथों में,नफ़रत क...
Juban-ए- दास्तां
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अक्सर ऐसा होता हैजब दो "जन" बात करते हैंएक रिश्ता बन जाता हैफिर प्रेम भरी तकरार कासमाँ बन्ध सा जाता हैउम्मीद जुड़ जाती हैकही निराशा हो जाती है"उसकी" फ़िक्र भीतर साँस लेती हैअक्सर ऐसा होता है...ख्याल सो जाते हैंनींद जागती रहती है...आँखे नम हो जाती हैकुछ थम सा जाता हैस...
Juban-ए- दास्तां
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चूड़ियाँ भी अपनी हद जानती हैरंगों का भी मतलब जानती है कलाई का फर्क जानती हैनीली,पीली,हरी,गुलाबी,नारंगी रंगों की होती है चूड़ियाँ पर इसमें लाल रंग जो है न वो चूड़ी होने से पहले अपने रंग की कद्र जानता हैअपने रंग की हद जानता हैये नाजुक कलाईयों में...
Juban-ए- दास्तां
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मैं चाहती थी एक कविता लिखनापर वो शब्द आते नहीं मेरे ज़हन मेंजो बयां कर सके उन संवेदनाओ को,जो महसूस होती हैं उन हर एक माता-पिताओं को,जिनके नोनिहालों ने ऑक्सीजन की कमी सेतोड़ दी थीं सांसे, छोड़ दिया था शरीर,और चले गए इस दुनिया से कहीं बहुत दूर।जिनकी उम्मीदें पंख लगने से...
Juban-ए- दास्तां
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उसे मेरी याद तो आती होगीजब चाँद की आग़ोश में सूरज छुप जाता होगा नदी की घाट से हर शख्स़ घर को लौट जाता होगा रेत पर लिखा हर नाम, मिट जाता होगा उसकी परछाई भी लम्बी हो जाती होगी हर रोज छत पर शाम जो आती होगी उसे मेरी याद तो आती होगी॥झट–पट गुस्से...
Juban-ए- दास्तां
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बीती यादों को लेकर ही मत जियो मरो..आगे और भी लोग आएंगे..जिन पर तुम्हारा दिल आएगाजो बीत गयी सो बात गयी अब बात कुछ करो नईपुराने में रखा क्या है अपना तो हर पल नया है जो सामने है उसे स्वीकार करो जो चला गया उसे मत याद करो यादों में रखा क्या है&n...
Juban-ए- दास्तां
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आप भी इस देश की संतान हैं ,किसने आपको पथभ्रष्ट किया है ,या स्वयं ही भूल गए हो ,आखिर तो आप भी इंसान हैं।किस चाह से हो लड़ रहे ,क्यों नफरतें फैला रहे ,लोगों में डर बैठा रहे ,क्या यही ईमान हैं।दबा देते हो चीखें , नहीं सिसकने भी देते ,बुझा देते हो नन्हे चराग़ को भ...
Juban-ए- दास्तां
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हाँ मैंने रोया बहुत, तुम्हारे जाने के बाद कई रात नहीं सोया, तुम्हारे जाने के बाद हमने बहुत कुछ खोया तुम्हारे जाने के बाद बड़ी मुश्किलों से खुद को संजोया, तुम्हारे जाने के बाद सब कुछ बहुत याद आता है, तुम्हारे जाने के बाद ॥    मैं जो तुमसे कह...