ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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1. था क्रूर हादसा दशहरा अमृतसर रेल-रावण को दोष मढ़ते हम। 2. येनेता  मौत में तलाशते अपनी जीत सम्वेदना लुप्त दोषारोपण ज़ारी। 3. वे लेते वेतन सरकारी हैं अधिकारी&nbsp...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में तूफ़ान रहा होगा आँखों में दरिया बहा होगा जब तितली तूफ़ान तबाही फैलाकरख़ून-पसीने की कमाई से बने नाज़ुक अरमानों से सजे  आशियाने उजाड़ता आगे बढ़ा होगा बचपन और बुढ़ापा बेबसी के साये में क़ुदरत के क़हर से&n...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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समाचार  आ  रहें -"काले रंग से भयभीत हैं सत्ताधारी नेता" ब्रह्माण्ड की रचना में है सत्त्व ,रज और तम गुणों की प्रधानता, सृष्टि के समस्त रंगों को सोखने  लेने की  है काले रंग में क्षमता। प्रतिशोध  विरोधद्...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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बुज़ुर्गोंने समझाया था रात को झाड़ू मत लगाना घर से लक्ष्मी चली जायेगी  सच कहा था बिजलीसे पहले का ज़माना कचरे के साथ क़ीमतीचीज़ भी जायेगी आजकल लम्बेडंडे में बँधी झाड़ू प्रसिद्दहो गयी है सेलिब्रिटी के नाज़ुक ह...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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समाचार आया है -"इसरो के वैज्ञानिक को मिला 24 साल बाद न्याय"न्याय के लिये दुरूह संघर्ष नम्बी नारायण लड़ते रहे चौबीस वर्ष इसरो जासूसी-काण्ड में पचासदिन जेल मेंरहे पुलिसिया यातना के थर्डडिग्री टॉर्चर भी सहे सत्ता और सियासत के खेलमें प्रोफ़ेसर नम...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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हटाओ फूलजो बने प्लास्टिक से देखो बगिया,आ गया है सावनज़ख़्मों का मरहम। आये उमड़मेघदूत नभ मेंलाये सन्देश,शोख़ लफ़्ज़ सुननेथी सजनी बे-सब्र।पवन चलीखुल गयी खिड़कीफुहार आयी,भिगोया तन-मनबारिश में अगन।मेघ मल्हार साथ आयी बहार बोले पपीहा, है घटा घनघोरनाचे झ...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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1वो नज़र फिरीतो क्या हुआदास्तान-ए-ग़म कीलज़्ज़त तो बरक़रार है,मेरे क़िस्से में उनकाउनके में मेरा नामआज भी शुमार है।2सहरा मेंरेत काचमकनामानोसितारों कीझिलमिल चिलमनके परे होमेरी कहकशाँख़ुश हूँ किउनके फ़लक़ पर हैमेरा भी नाम-ओ-निशाँ।  3तन्हा सफ़रभला किसमुसाफ़िर को&n...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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बाँझ हो जाती है ज़मींनक़ल बाज़ार की  करता है जब किसान सरकार को आता है पसीनापसीने की कमाई का भाव  जब माँगता है किसान।  #रवीन्द्र सिंह यादव 
 पोस्ट लेवल : हिंदी रचना क्षणिका
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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गुज़रे हुए सालों की तरफ़ दौड़ी है आज थकी बेचैन  नज़र फ़िक़रे और तंज़ का वो दौर जिसमें नहीं था कोई हमसफ़र। चाँद से माँगी थी शबनम में भीगी ठंडी चाँदनी मगर सूरज अड़ गया दिखाने शोलों-सी मर्दानगी। धूप सहन न हुई तो आये पीपल क...
 पोस्ट लेवल : हिंदी रचना नज़्म
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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क्षणिकाऐं स्वप्न-महल  बनते हैं महल सुन्दर सपनों के चुनकर उम्मीदों के नाज़ुक तिनके लाता है वक़्त बेरहम तूफ़ान जाते हैं बिखर तिनके-तिनके। सफ़र जीवन के लम्बे सफ़र में समझ लेता है दिल जिसे हमराह...