ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
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जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगीअभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !कुछ चाहतें द...
शिवम् मिश्रा
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 हास्य, व्यंग्य और कविता प्रेमियों को ८ जून'०९ के  बाद ८ जुलाई'०९ को एक और सदमा लगा जब ८ जून'०९ से जिंदगी से संघर्ष कर रहे मशहूर हास्य कवि पंडित ओम व्यास 'ओम' जी का ०८ जुलाई'०९ की सुबह दिल्ली में निधन हो गया। ज्ञात हो ओम व्यास जी ०८ जून'०९ को एक...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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लोसर : परंपरा और संस्कृति का पर्वलदाख अंचल को उसकी अनूठी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जाना जाता है। लदाख के बारे में ह्वेनसांग, हेरोडोट्स, नोचुर्स, मेगस्थनीज, प्लीनी और टॉलमी जैसे यात्रियों ने बताया है। इससे लदाख के अतीत का पता चलता है। किसी भी क्षेत्र के अतीत क...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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बळिहारी उण देस री, माथा मोल बिकाय ।धव धावाँ  छकिया  धणाँ, हेली आवै दीठ ।मारगियो  कँकू  वरण,  लीलौ  रंग  मजीठ ।।नहँ  पड़ोस  कायर  नराँ,  हेली वास सुहाय ।बलिहारी उण देस री,  माथा मोल बिकाय ।।घोड़ै चढ़णौ&nbsp...
सतीश सक्सेना
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इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना ! दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !विदूषक हैं , यहाँ धर्माधिकारी ,उनके शिष्यों के , इन हिंदी पुरस्कारों के लिए,अपमान सा...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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बलखङ चौक से दीवानों की गली तकआज न जाने क्यों धरती के उस निहायत छोटे-से टुकड़े पर लिखने के लिए कलम उठ गई। धरती का वह टुकड़ा, जो इतना छोटा-सा है, कि कुल जमा दो-सवा दो सौ कदमों से नापा जा सकता है। अगर कोई यह समझ बैठे, कि इन दो सौ-सवा दो सौ कदमों को वह ज्यादा से ज्यादा...
mahendra verma
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‘शिवसिंह सरोज’, एक ग्रंथका नाम है, जिसकी रचना आज से 143 वर्ष पूर्व जिला उन्नाव, ग्राम कांथा निवासी शिवसिंह सेंगर नाम के एक साहित्यानुरागी ने की थी । इस ग्रंथ में पंद्रहवीं शताब्दी से लेकर सन् 1875 ई. तक के 1003 हिंदी कवियों का संक्षिप्त आलोचनात्मक विवरण और उनकी कुछ...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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राजविद्या-राजगुह्य योग और विनोबा भावे के विचारइदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ।। राजविद्या  राजगुह्यं  पवित्रमिदमुत्तमम् । प्रत्यक्षावगमं  धर्म्यं सुसुखं कर्तुमाव्ययम् ।।1श्रीमद्भगवद्गीता के न...
सतीश सक्सेना
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अबतक लगभग 300 गीत कवितायेँ एवं इतने ही लेख लिख चुका हूँ मगर प्रकाशनों, अख़बारों, कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों में नहीं जाता और न प्रयास करता हूँ कि मुझे लोग पढ़ें या सुने ! 300 कविताओं में मुझे अपनी एक भी कविता का कोई भी छंद पंक्ति याद नहीं क्योंकि मैं उन्हें लिखने के...
डॉ. राहुल मिश्र Dr. Rahul Misra
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वारकरी संप्रदाय की उत्पत्ति के आधार और इनका वैशिष्ट्यभारतवर्ष की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था धर्मप्रधान रही है और प्रमुख तत्त्व के रूप में भक्ति की व्याप्ति को भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था में देखा जा सकता है। भारतीय विद्वानों के साथ ही अनेक विदेशी विद्वानों...