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sanjiv verma salil
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'शाम हँसी पुरवाई में' विमोचन पर मुक्तिकाआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*शाम हँसी पुरवाई में। ऋतु 'बसंत' मनभाई में।।झूम उठा 'विश्वास' 'सलीम'।'विकल' 'नयन' अरुणाई में।।'दर्शन' कर 'संतोष' 'अमित'।  'सलिल' 'राज' तरुणाई में।।छंद-छंद 'अमरेंद्र' सरस्। 'प्...
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 मुक्तिका*ख़त ही न रहे, किस तरह पैगाम हम करें आगाज़ ही नहीं किया, अंजाम हम करें * यकीन पर यकीन नहीं, रह गया 'सलिल' बेहतर है बिन यकीन ही कुछ काम हम करें. *गुमनाम हों, बदनाम हों तो हर्ज़ कुछ नहीं कुछ ना करें से बेहतर है काम हम करें. *हो दोस्ती या दुश्मनी, कुछ तो...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका हिंदी ग़ज़ल
sanjiv verma salil
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 हिंदी ग़ज़ल - बहर --- २२-२२ २२-२२ २२२१ १२२२ *है वह ही सारी दुनिया में, किसको गैर कहूँ बोलो?औरों के क्यों दोष दिखाऊँ?, मन बोले 'खुद को तोलो' *​खोया-पाया, पाया-खोया, कर्म-कथानक अपना है क्यों चंदा के दाग दिखाते?, मन के दाग प्रथम धो लो *जो बोया है काटोगे भी, चाह...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका हिंदी ग़ज़ल
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 मुक्तिका *बाग़ क्यारी फूल है हिंदी ग़ज़ल या कहें जड़-मूल है हिंदी ग़ज़ल.बात कहती है सलीके से सदा- नहीं देती तूल है हिंदी ग़ज़ल.आँख में सुरमे सरीखी यह सजी दुश्मनों को शूल है हिंदी ग़ज़ल.जो सुधरकर खुद पहुँचती लक्ष्य पर सबसे पहले भूल है हिंदी ग़ज़ल .दबाता जब जमाना तो उड़ जमे...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका हिंदी ग़ज़ल
sanjiv verma salil
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हिंदी ग़ज़ल*ब्रम्ह से ब्रम्हांश का संवाद है हिंदी ग़ज़ल।आत्म से परमात्म की फ़रियाद है हिंदी ग़ज़ल।।*मत गज़ाला-चश्म कहना, यह कसीदा भी नहीं।जनक-जननी छन्द-गण, औलाद है हिंदी ग़ज़ल ।।*जड़ जमी गहरी न खारिज़ समय कर सकता इसेसिया-सत सी सियासत, मर्याद है हिंदी ग़ज़ल ।।*भार-पद गणना, पदांतक...
 पोस्ट लेवल : हिंदी ग़ज़ल
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मुक्तिका*बाग़ क्यारी फूल है हिंदी ग़ज़लया कहें जड़-मूल है हिंदी ग़ज़ल.बात कहती है सलीके से सदा-नहीं देती तूल है हिंदी ग़ज़ल.आँख में सुरमे सरीखी यह सजीदुश्मनों को शूल है हिंदी ग़ज़ल.जो सुधरकर खुद पहुँचती लक्ष्य परसबसे पहले भूल है हिंदी ग़ज़ल.दबाता जब जमाना तो उड़ जमेकलश पर वह धू...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका हिंदी ग़ज़ल
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ॐ-: विश्व वाणी हिंदी संस्थान - समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर :-  ll हिंदी आटा माढ़िए, उर्दू मोयन डाल l 'सलिल' संस्कृत सान दे, पूड़ी बने कमाल ll   ll जन्म ब्याह राखी तिलक, गृह प्रवेश त्यौहार l  'सलिल' बचा...
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हिंदी ग़ज़ल / मुक्तिका [रौद्राक जातीय, मोहन छंद, ५,६,६,६]*''दिलों के / मेल कहाँ / रोज़-रोज़ / होते हैं''मिलन के / ख़्वाब हसीं / हमीं रोज़ / बोते हैं *बदन को / देख-देख / हो गये फि/दा लेकिनन मन को / देख सके / सोच रोज़ / रोते हैं*न पढ़ अधि/क, ले समझ/-सोच कभी /तो थ...
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हिंदी ग़ज़ल १. चलें भी चलें *वर्णिक छंद: वृहती जातीय, नवधा छंद मात्रिक छंद- भागवत जातीय, अष्टाक्षरी अनुष्टुप जातीय छंद, मापनी:१२२ १२२ १२, यगण यगण लघु गुरु, सूत्र ययलग बहर: फऊलुं फऊलुं फअल *चलें भी चलें साथ हम करें दुश्मनों को ख़तम *न पीछे हटेंगे कदम&n...
 पोस्ट लेवल : hindi gazal हिंदी ग़ज़ल
sanjiv verma salil
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मुक्तिकाआपकी मर्जी*आपकी मर्जी नमन लें या न लेंआपकी मर्जी नहीं तो हम चलें*आपकी मर्जी हुई रोका हमेंआपकी मर्जी  हँसीं, दीपक जलें*आपकी मर्जी न फर्जी जानते आपकी मर्जी सुबह सूरज ढलें*आपकी मर्जी दिया दिल तोड़ फिर  आपकी मर्जी बनें दर्जी सिलें*आपकी मर्जी हँसा...