ब्लॉगसेतु

mukesh bhalse
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मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न होकठिन सही तेरी मंजिल मगर उदास न होकदम कदम पे चट्टानें खडी रहें लेकिनजो चल निकले हैं दरिया तो फिर नहीं रुकतेहवाएँ कितना भी टकराएँ आँधियाँ बनकरमगर घटाओं के परचम कभी नहीं झुकतेमेरे नदीम मेरे हमसफ़र ......हर इक तलाश के रास्ते में मुश्किलें...
Bhavana Lalwani
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हम सब फूलों से  प्यार करते हैं. हम सबको फूल  ही चाहिए.हम सब फूलों के मखमली कालीन पर चलना चाहते हैं. हम सब फूलों के नाज़ुक बिछौनों पर सोना चाहते हैं. हम सब  फूलों से बनी  नर्म और महकती हुई गर्म रजाइयां ओढ़ कर सुख के सपने देखना चाहते हैं...
 पोस्ट लेवल : हिंदी निबंध Esaays
Bhavana Lalwani
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उसने आहिस्ता से आंखें खोली...पलकें भारी और सर में  बहुत दर्द महसूस हो रहा था..कुछ आवाजें सुनाई दीं, कोई उसके पास आकर  कुछ  कह रहा है...लेकिन क्या ये समझ नहीं आ पाया, उसने इधर उधर देखने की कोशिश की..पर आँखें बेहद भारी लगीं..उसे कुछ लोग अपने आस पास खड़...
अविनाश वाचस्पति
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Bhavana Lalwani
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भूख सबको लगती है, इंसान हो या जानवर, कोई इस प्राकृतिक आवशयकता से परे नहीं है  ..ऐसा इस नश्वर संसार में कोई  नहीं हो सकता जो कहे कि मुझे भूख नहीं लगती...और फिर हमारे देश में तो पितरों को भी साल में एक भोजन करवाया जाता है (हाँ उनके नाम पर पंडित और ब्राह्मण...
Bhavana Lalwani
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वो जो तेरे साथ गुज़रा, वो वक़्त, वो लम्हा अब भी मेरी साँसों में जिंदा है...अब उसकी ही  खुमारी में आने वाला वक़्त भी गुज़र ही जाएगा.. वो जो गुज़र गया, वो बेशकीमती था पर उसे संभाल के  कहीं रख सकें ऐसा कोई कोना नहीं मिला..कुछ गुज़रा वक़्त, कुछ उसकी याद,...
 पोस्ट लेवल : हिंदी निबंध Esaays Hindi Essays
Mayank Bhardwaj
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आज बहुत महीनो के बाद आपके लिए कुछ मूवी लाया हु ये सब मूवी डरावनी मूवी है और सबसे बड़ी बात ये सब ओरिजनल और हिंदी में है तो देर किस बात की आप भी इन मूवी को डाउनलोड करे और होर्रोर मूवी की दुनिया में खो जाये मुझे तो होर्रोर मूवी बहुत अच्छी लगती है उम्मीद करता हु आपको भ...
 पोस्ट लेवल : Hollywood Movie हिंदी में
Kajal Kumar
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वह एक मध्‍यवर्गीय परिवार से था. कुछ बड़ा हुआ तो उसे घर वालों ने एक स्‍कूल में भर्ती करवा दिया. घर पर उसे भोलू कहते थे सो स्‍कूल में उसका नाम भोलू चंद लिखवाया गया. तब अंग्रेज़ी स्‍कूलों का न तो रिवाज़ था न ही मध्‍यवर्गीयों की हैसियत थी भोलुओं को अंग्रेज़ी स्‍कूलों म...
Bhavana Lalwani
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जब खुदा अपना दरवाजा बंद कर लेता है तब...दुनिया अपना दरवाजा खोल देती है...अपनी बाँहें फैला देती है ..समेट लेती  है अपने आँचल में, अपनी गोद में, इस तरह कि अपना ही होश नहीं रहता, ऐसे कि उसके प्यार का नशा जागते हुए  भी सोते रहने को मजबूर कर देता है, ख्वाब दिख...
अरुण कुमार निगम
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– जनकवि स्व.कोदूराम ”दलित”  भारत के आज जन-जन  फूले नहीं समातेभारत के आज कण-कण  फूले नहीं समातेभारत का कोना-कोना  है  आज जगमगायागणतंत्र  पर्व  आया  ,  गणतंत्र  पर्व आया.माँ हिंद के जलधि ने  पावन चरण पखारेमंडर...