ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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कवि जी पुराने ही हैं ..बारूद की स्याही से , नया इंकलाब लिखने बैठा हूं मैं , सियासतदानों , तुम्हारा ही तो हिसाब लिखने बैठा हूं मैं बहुत लिख लिया , शब्दों को सुंदर बना बना के , कसम से तुम्हारे लिए तो बहुत , खराब लिखने बैठा हूं मैं टलता ही रहा है अ...
अजय  कुमार झा
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कवि जी , इन कविताई पोज़ हां ,बदल ही गया होगा दस्तूर जमाने का ,अब ,खतों का मेरे , कोई जवाब नहीं देता ॥सयाने हुए हैं सारे , अब जरूरत नहीं होती,यही वजह है कि , तोहफ़े मे अब कोई किताब नहीं देता ॥अब कहां , कशिश बची है मोहब्बत की , किताबों में रखने को , कोई अब गुलाब नहीं द...
ललित शर्मा
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ललित शर्मा
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अजय  कुमार झा
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यूं तो आप अभी सिर्फ़ लादेन से जुडी खबरों पर विषयों पर और उसकी दाढी मूंछ न काट कटा पाने पर भी लिख सकते हैं अगले एक महीने तक ..( सिंपल है जी , जब लादेन से जुडी बातें खत्म हो तो उसके बच्चों , पोते पोतियों सब पर भिड जाइए ) लेकिन चूंकि पिछले दिनों हिंदी ब्लॉग जगत के अति...
अविनाश वाचस्पति
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अविनाश वाचस्पति
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कलम हैं या हैं उंगलियां बनती हैं सुविचार मानस के आर या होती हैं पार सुविचार बस जाते हैं सज्‍जन के मन में दुर्जन के जन में जन को बनायें सज्‍जन हिंदी ब्‍लॉगरों का ऐसा है मन।
अजय  कुमार झा
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अब तक कल के आयोजन पर इतना कुछ कहा सुना पढा जा चुका है कि कोई गुंजाईश बची नहीं है , लेकिन फ़िर भी एक ब्लॉगर होने के नाते , उस कार्यक्रम मे शिरकत करने के नाते और अब तक उस आयोजन में मुझे दिखी सकारात्मक बातों को ( हां बहुत ही अफ़सोस के साथ लिखना पड रहा है कि हिंदी ब्लॉ...
अरुण कुमार निगम
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रिश्ते बनाना बड़ा ही सरल,बहुत ही कठिन है निभाना सखा !अगर जिंदगी में कोई शख्स आयेतो ये बात उसको बताना सखा !हँसी में ,ख़ुशी में सभी साथ देंगेमगर दुःख पड़ा तो,नहीं साथ देंगेदुःख में तुम्हारे जो संग-संग चलेउसे मीत अपना बनाना सखा !है मतलब की दुनियाँ,है मतलब की यारीतन...
अजय  कुमार झा
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मजदूर दिवस को ,फ़िर आज ,मनाने की ,जोरदार थी तैयारी ....मीडिया की ,फ़िर मंत्री जी की ,और टाटा-बिडला की भी ,आज आनी थी बारी ,सबने की घोषणा ,अबकि इसे,मजदूरों के बीच ही ,जाकर मनाया जाएगा कितनी चिंता है ,आज हमें, कामगारों की ,उन्हें साथ बिठाकर ये बताया जाएगा शहर के छोर की...