ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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भाई जी, आपका ठिया तो सबसे बड़े बाजार में है. पता चला है, होल सेल में डील करते हो. कुछ हमें भी बताओ भाई, सुना है दिवाली सेल लगी है आपके बाजार में.हमने कहा कि दिवाली कहो या दिवाला. सेल तो लगी है ६०% से ७०% की भारी छूट चल रही है. एस एम एस से विज्ञापन भी किया जा रहा है....
समीर लाल
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अगर आपके पास घोड़ा है तो जाहिर सी बात है चाबुक तो होगी ही. अब वो चाबुक हैसियत के मुताबिक बाजार से खरीदी गई हो या पतली सी लकड़ी के सामने सूत की डोरी बाँधकर घर में बनाई गई हो या पेड़ की डंगाल तोड़ कर पत्तियाँ हटाकर यूँ ही बना ली गई हो. भले ही किसी भी तरह से हासिल की गई ह...
समीर लाल
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जिस हिसाब से आज इतिहास बदला जा रहा है, सड़को और शहरों के नाम बदले जा रहे हैं, गांधी नेहरू के काम बदले जा रहे हैं, ऐसे में पुराने समय की कहावतें और मुहावरों को भी एक बार पुनः देखा जाना चाहिये एवं अगर आवश्यक लगे तो बदला जाना चाहिए. यूँ तो अन्य चीजों में बदलाव बिना आवश...
अजय  कुमार झा
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जैसे जैसे ब्लॉगिंग की तरफ लौट रहा हूँ तो देख रहा हूँ कि हिंदी ब्लॉगिंग का प्रवाह सच में ही बहुत कम हो गया है | हालत ये है की पूरे दिन में यदि पचास पोस्टें भी नज़रों के सामने से गुज़र रही हैं तो उसमें से दस तो वही पोस्टें हैं जो इन पोस्टों के लिंक्स लगा रही हैं | &nbs...
अविनाश वाचस्पति
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लखनऊ (25 अगस्त) :  हिन्दी भाषा की विविधता, सौन्दर्य, डिजिटल और अंतराष्ट्रीय स्वरुप को विगत 14 वर्षों से वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठापित करती आ रही लखनऊ की संस्था परिकल्पना के 13वीं वार्षिक महासभा में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे लखनऊ परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ श्र...
समीर लाल
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हाल ही गोयनका जी के विपश्यना शिविर से लौटे. एक अद्भुत अनुभव. शायद अब बार बार जाना हो. लेकिन हम जैसे व्यंग्यकारों का मन तो हर जगह से कुछ और ही खोज लाता है. हमें तो राजपथ पर भी चलवाओ तो भी नजर साईड वॉक पर ही रहती है. अन्यथा मेरा अब मानना है कि हर व्यक्ति को अगर मौका...
समीर लाल
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इस बार देश में ऐसी भीषण गर्मी पड़ी कि अच्छे अच्छों की गरमी उतार कर रख दी.चुनाव की गरमी उतरी और बस, सूरज महाराज ने कमान थाम ली. मीडिया से कहने लगे कि अब हमें कवरेज दो. टीआरपी का मजा तुम लूटो और जबरदस्त कवरेज के कारण सेलीब्रेटी होने का मजा हम लूटेंगे. बस, फिर क्या था...
शिवम् मिश्रा
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व्यंग्य लेखन कहानी/कथा/कविता की तरह ही एक महत्वपूर्ण विधा है. जिस तरह कहानी या कविता को अपनी संपूर्णता में लिखना हर किसी के लिए संभव नहीं .सोशल मीडिया की छोड़ ही  दें. यहाँ हर  व्यक्ति लेखक है, पाठक गायब हैं. सितम बेचारे लोगों पर यह भी कभी- कभार हम भी लेखक...
समीर लाल
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अगर आपको यह लगता है कि बुद्धिजीवी बुद्धिमान होता है तो यह आपकी गलतफहमी हैं. बुद्धिजीवी और बुद्धिमानी का वो ही रिश्ता होता है जैसा कि जगमग रोशन ईमारतों का अपनी घुप्प अंधेरी नींव से होता है. बड़ी बड़ी बेवकूफियों की आधारशीला पर इन ऊँचे बुद्धिजीवियों के गुंबद खड़े है.मूलत...
Ravindra Prabhat
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() रवीन्द्र प्रभात इसमें कोई संदेह नहीं कि हिन्दी ब्लॉग की दुनिया ने किसी भी माध्यम की तुलना में बेहतर ढंग से नोटिस लेने की पूरी कोशिश की है। ब्लॉग की खुलती अनंत खिड़कियाँ ये साबित करती हैं कि अब पेशेवर लोग ही नहीं आम लोग भी अपने समय की हलचलों और मुद्दों पर अप...