--कुंकुम बिन्दी मेंहदी, काले-काले बाल।रचकर दिखलाती हिना, अपना खूब कमाल।।--मेंहदी को मत समझना, केवल एक रिवाज।सुहागिनों का गन्ध से, हिना खोलती राज।।--हरी-भरी रहती हिना, क्या पतझड़-मधुमास।बिना हिना के सेज पर, खलता है सुख रास।।--बालक बृद्ध जवान को, देती है आनन्द।श...