ब्लॉगसेतु

rishabh shukla
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रास्ते जीवन की डगर पर मुश्किलें कई है,बस है चलते जानाlइसने तो निकलने का,कोई तो रास्ता होगाllयदि कोई मुँह मोड़ ले,इस मुश्किल घड़ी मे ना घबरानाlकोई मिले तुमसे अगर, कोई तो वास्ता होगाllमेरे मन की - https://meremankee.blogspot.com/घुमन्तू - https://th...
rashmi prabha
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मन को बहलानेऔर भरमाने के लिएमैंने कुछ ताखों परतुम्हारे होने की बुनियाद रख दी ।खुद में खुद से बातें करते हुएमैंने उस होने में प्राण प्रतिष्ठा की,फिर सहयात्री बन साथ चलने लगी,चलाने लगी ...लोगों ने कहा, पागल हो !भ्रम में चलती हो,बिना कोई नाम दिए,कैसे कोई ख्याली बुत बन...
रविशंकर श्रीवास्तव
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भोपाल में होने जा रहे हिंदी साहित्य के विश्वरंग कार्यक्रम में उक्त विषय पर मुझे अपनी प्रस्तुति देना है. निम्न आलेख तैयार किया है. कृपया बताएँ कि कहीं कोई कुछ छूट तो नहीं रहा है या कहीं कुछ सही गलत हो रहा है. धन्यवाद.--माननीय मंच व सदन को मेरा सादर अभिवादन.विद्वान व...
 पोस्ट लेवल : तकनीकी तकनीक हिन्दी
समीर लाल
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कुछ लोग नमस्कार करने में पीर होते हैं और कुछ नमस्कार करवाने में. नमस्कार करने वाले पीर, चाहे आपको जाने या न जाने, नमस्ते जरुर करेंगे. कुछ हाथ जोड़ कर और कुछ सर झुका कर, शायद उनको मन ही मन यह शान्ति प्राप्त होती होगी कि अगले को नमस्ते किया है और उसने जबाब भी दिया है...
समीर लाल
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१२ वीं के परिणाम घोषित हुए. लड़कियों ने फिर बाजी मारी. ये अखबार की हेड लाईन्स बता रही थी. जिस बच्ची ने टॉप किया था उसे ५०० में से ४९६ अंक मिले हैं यानि सारे विषय मिला कर मात्र ४ अंक कटे, बस! ये कैसा रिजल्ट है?हमारे समय में जब हम १० वीं या १२ वीं की परीक्षा दिया करते...
समीर लाल
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कालेज के दिनों की याद आई. हम दोस्तों के साथ पिकनिक पर जाया करते थे तो सब मिलकर चिकन पकाते थे. वो स्वाद अब तक जुबान पर है और बनाने की विधि भी कुछ कुछ याद थी. बस फिर क्या था, मैंने एलान कर दिया कि आज रसोई खाली करो, चिकन हम बनाएंगे.अँधा क्या चाहे, दो आँखें. पत्नी तुरं...
समीर लाल
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बाजार जाता हूँ तो देख कर लगता है कि जमाना बहुत बदल गया है. साधारण सी स्वभाविक बातें भी बतानी पड़ती है. कल जब दही खरीदने लगा तो उसके डिब्बे पर लिखा था कि यह पोष्टिक दही घास खाने वाली गाय के दूध का है. मैं समझ नहीं पाया कि इसमें बताने जैसा क्या है? गाय तो घास ही खाती...
समीर लाल
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बचपन में वह बदमाश बच्चा था. जब बड़ा हुआ तो गुंडा हो गया. और बड़ा हुआ तो बाहुबली बना. फिर जैसा कि होता है, वह विधायक बना और फिर मंत्री भी. नाम था भगवान दास.रुतबे और कारनामों की धमक ऐसी कि पुलिस भी काँप उठे. कम ही होते हैं जो इस कहावत को धता बता दें कि पुलिस से बड़ा कौन...
rashmi prabha
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सात समंदर पार ... मेरी अम्मा स्व सरस्वती प्रसाद जी की कलम का जादू है । बचपन के खेल, परतंत्र राष्ट्र के प्रति उनके वक्तव्य उनकी कल्पना को उजागर करते हैं ।यह कहानी मैंने कितनी बार पढ़ी, कितनों को सुनाई ... मुझे ख़ुद याद नहीं... लेकिन जितनी बार इस कथा-यात्रा से गुज़री ,...
समीर लाल
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बहुत सूक्ष्म अध्ययन एवं शोध के बाद लेखक इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि यदि आपके नाम के अन्त में आ की मात्रा लगाने के बाद भी नाम आप ही का बोध कराये तो आप अन्तरराष्ट्रीय स्तर के हो सकते हैं.जैसे उदाहरण के तौर पर लेखक का नाम समीर है. यदि आपको समीर नाम सुनाई या दिखाई पड़े...