ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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रेडियो पर गाना सुन रहे हैं कान में इयर फोन लगा कर:कहीं किसी रोज यूँ भी होताहमारी हालत तुम्हारी होतीजो रात हमने गुजारी मर केवो रात तुमने गुजारी होती!!कितनी गुलजार रात है आज रविवार की...बाहर बहुत कुड़कुड़ा देने वाली -१० ठंड है..सुनसान सड़क..बरफ की चादर ओढ़े हुए..घर के...
केवल राम
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गत अंक से आगे.....हिन्दी ब्लॉगिंग का प्रारम्भिक दौर बहुत ही रचनात्मक था. इस दौर में जो भी ब्लॉगर ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय थे, वह इस माध्यम के प्रति काफी रचनात्मक और गम्भीर थे. हालाँकि उस समय अंतर्जाल पर हिन्दी को लेकर कुछ तकनीकी बाधाएं जरुर थीं, लेकिन हिन्दी...
केवल राम
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गत अंक से आगे....सन 2011 तक आते-आते ऐसा लगने लगा था कि ब्लॉगिंग के माध्यम से हिन्दी ब्लॉगर आने वाले समय में साहित्य-समाज-संस्कृति-राजनीति-अर्थव्यवस्था जैसे विषयों के साथ-साथ उन तमाम विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे जो अभी तक चर्चा से अछूते रहे हैं. ब्लॉगिंग को अभिव्यक...
केवल राम
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जरा उन दिनों को याद करते हैं जब हम हर दिन अपना ब्लॉग देखा करते थे. कोई पोस्ट लिखने के बाद उस पर आई हर टिप्पणी को बड़े ध्यान से पढ़ते थे. साथ ही यह भी प्रयास होता था कि जिसने पोस्ट पर टिप्पणी की है, बदले में उसके पोस्ट पर जाकर भी टिप्पणी कर आयें. हम कोई पोस्ट लिखें या...
वंदना अवस्थी दुबे
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मेरा बचपन जिस स्थान पर गुज़रा वह मध्य-प्रदेश का एक छोटा लेकिन सुंदर सा क़स्बा है-नौगाँव। कस्बा, आबादी के लिहाज़ से, लेकिन यह स्थान पूर्व में महत्वपूर्ण छावनी रह चुकी है। आज भी यहाँ पाँच हज़ार के आस-पास आर्मी है और अपने क्लाइमेट के कारण आर्मी अफसरों की आरामगाह है। ल...
 पोस्ट लेवल : ईद हिन्दी ब्लॉगिंग
समीर लाल
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किसान है बिरजू..तो तय है परेशान तो होगा ही..मरी हुई फसलें और उनके चलते सर पर चढ़े बैंक के लोन का बोझ..ये परेशानी भी ऐसी वैसी नहीं है..उस सीमा तक की है कि बिरजू जान गया था अब आत्म हत्या के सिवाय कोई विकल्प बाकी नहीं बचा है.वो सुबह सुबह उठा, पत्नी और बच्चों को सोते मे...
हर्षवर्धन त्रिपाठी
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हिन्दुस्तान में आज जो कुछ भी होता है, उसकी बुनियाद सोशल मीडिया पर ही तैयार होती है। यहां तक कि खुद को मुख्य धारा कहने वाले, टीवी और अखबार, मीडिया संस्थान भी सोशल मीडिया से ही खबरों को ले रहे हैं, विस्तार दे रहे हैं। लेकिन, इस बात का अन्दाजा कितने लोगों को होगा कि इ...
केवल राम
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हिन्दी ब्लॉगिंग को लेकर मेरे मन में ही नहीं बल्कि हर ब्लॉगर और ब्लॉग पाठक के मन में एक अजीब सा आकर्षण है. जब भी कोई ब्लॉगिंग की दुनिया में पदार्पण करता है, या ब्लॉगिंग से किसी का परिचय होता है तो वह इस अनोखी दुनिया में  रम सा जाता है. ब्लॉगिंग का आकर्षण ही कुछ...
Ravindra Prabhat
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प्रतिबद्ध हूँ, संबद्ध हूँ और आवद्ध हूँ ..... बाबा आपके सुझाए रास्ते पर चल सकूँ बस इसलिए कटिबद्ध हूँ। साहित्य हो या ब्लॉग दोनों रचनात्मकता से सकारतमकता की ले चलने का मार्ग है। ब्लॉग यानी चिट्ठा मनुष्य की समता और ममता को मजबूती प्रदान करता है। बसर्ते लेखन में प्रतिब...
Khushdeep Sehgal
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कल चमन था आज इक सहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ...हिंदी ब्लॉग जगत की जो हालत है, उसे देखकर ये गाना खुद-ब-खुद लबों पर आ जाता है...16 अगस्त, 2009 को जब मैंने अपने ब्लॉग 'देशनामा' पर पहली पोस्ट डाली थी, उस वक्त हिंदी ब्लॉगिंग अपने पूरे उरूज पर थी...वो जो हममें तु...