ब्लॉगसेतु

समीर लाल
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पूरा भारत घर में बंद है सिर्फ उनको छोड़कर जिनको बाहर होना चाहिये जैसे डॉक्टर, पुलिस आदि. साथ ही कुछ ऐसे भी बाहर हैं जो पुलिस से प्रसाद लिए बिना अंदर नहीं जाना चाहते. मगर घर में बंद लोग पूरी ताकत से व्हाटसएप पर चालू हैं. अगर व्हाटसएप का मैसेज मैसेज न हो कर एक पैसे वा...
rashmi prabha
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मैं तुमसे या कर्ण सेबिल्कुल कम नहीं रही अर्जुन,लक्ष्य के आगे से मेरी दृष्टिकभी विचलित नहीं हुई ...परिस्थितियों के आगे एकलव्य की तरहमैंने आत्मविश्वास की मूर्ति बनाईलक्ष्य साधा,तुमसे (अर्जुन से)अधिक प्रबल हुईपर वहीं कर्ण की सहनशीलता अपनाकरश्राप की हकदार हुई !लेकिन,यु...
समीर लाल
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भारत यात्रा के दौरान सूचना दी मित्र को कि उनके शहर दर्शन पर हैं सपरिवार. शहर देखेंगे, कुछ सिद्ध मंदिरों मे दर्शन कर प्रभु का आशीष प्राप्त कर आप तक कल पहुँचेंगे.मित्र ने हिदायत दी कि मंदिर में भीड़ बहुत होती है, अतः दर्शन टाल दिया जाये. करोना वायरस फैला है, खतरा न पा...
rashmi prabha
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हँसते,भागते,खेलते हुए,सुबह से दोपहरफिर शाम,और रात हो जाती हैबदल जाती है तारीख ।सोचती रहती हूँ,अभी तो हम मिले थे,मीलों साथ चले थे,और किसी दिनकभी तुमकभी मैंगाड़ी में बैठते हुएहाथ छूते हैं,कुछ दूर हाथ हिलते हैंफिर गाड़ी का शीशा बन्दगेट से बाहर निकलने के पहले हीहम ओझल हो...
rashmi prabha
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जब भी कहीं से गुजरा हूँया गुजरी हूँएक फुसफुसाहट नेविद्युत गति से,मेरा पीछा किया है"टूटे घर से है" ...टूटा घर !क्या सच में टूटा हुआ घर वो है,जिसमें माता पिता अलग हो जाते हैंया वह घर है,जिसमें बच्चों की दुहाई देतेमाता पिता रात दिन चीखते-चिल्लाते हैं !न जमीन अपनी लगती...
rashmi prabha
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अपहरण,हत्या,विस्फोट,गोलीबारी,यातायात दुर्घटना,किसी लड़की के पीछेकिसी का साइकिक दीवानापन,उसका जीना हराम करना,घरेलू हिंसा,यौन हिंसा ...ये तमाम हादसे उनके साथ हीताज़िन्दगी असरदार होते हैं,जिनका सीधा संपर्क होता है(उसमें भी कुछ बेअसर होते हैं)वरना सब बुद्धिमानी के चोचले...
समीर लाल
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बिजली विभाग औरउसकी रहवासी कॉलिनियोंसे मेरा बड़ाकरीब का साबकारहा है. पिताजी बिजली विभागमें थे और हम बचपनसे ही उन्हींकॉलिनियों में रहतेआये.मैने बहुत करीबसे बिजली सेखम्भों को लगते देखा है, एक से एक ऊँचे ऊँचे. उच्च दाब विद्युतवाले लंबे लंबेखम्भे और टॉवर भी, सबलगते देखें...
rashmi prabha
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घृणा, नफरत से बहुत हद तक उबरी हूँ,पर - अतीत के दुखद सत्य से नहीं !वह सत्य,जिसके आगे अवाक मैं,महीनों बीमार रही,बेवजह रोती-चीखती रहीऔर एक उम्मीद लेकर सूखे आंसुओं के साथ सो गईकि कल सुबह सब ठीक होगा,मेरे सत्य की बारीकियों से वे बेचैन हो उठेंगेजिन्हें मैंने निःस्वा...
समीर लाल
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मौका है भारत से सात समंदर पार कनाडा में हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार के लिये आयोजित समारोह का. अब समारोह है तो मंच भी है. माईक भी लगा है.टीवी के लिये विडियो भी खींचा जा रहा है. मंच पर संचालक, अध्यक्ष, मुख्य अतिथि विराजमान है और साथ ही अन्य समारोहों की तरह दो अन्य प्...
rashmi prabha
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 जब जब मन का दरवाजा खोलकरबाहर देखा हैएक बेबस शोर देखा हैऔर उस शोर में खुद को डुबोते लोग !इन्हें देखकर,कोई धारणा मत बनाओसब के सब हारे हुए हैंऔर खुश होने के उपक्रम मेंलगे हुए हैं ।कोई समन्दर की लहरों की शून्यता मेंएक नन्हीं सी लहर ढूँढ रहा हैकोई बंजारों को देखते...