ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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मैं ही क्यों अर्से तकरह जाती हूँ पेशोपेश में !बिना किसी जवाब केबड़बड़ाती जाती हूँ,बिना किसी उचित प्रसंग केमुस्कुराती जाती हूँजबकि सामनेवाले के पासहोती है गजब की तटस्थता,स्याह कोहरे सी ख़ामोशी,और सिर्फ अपनी खींची हुई लकीरें ।...अगर चाहतीतो मैं भी अपने अासपासआत्मसम्मान...
समीर लाल
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भारत की आबादी को अगर आप त्रिवेणी पुकारना चाहते हैं, तो इत्मिनान से पुकार लिजिये. आपके पास तो अपने त्रिवेणी कहने का आधार भी होगा वरना तो लोग कुछ भी जैसे अंध भक्त, भक्त, देश द्रोही, गद्दार, पप्पू, गप्पू आदि जाने क्या क्या पुकारे चले जा रहे हैं, कोई कहाँ कुछ पूछ पा रह...
rashmi prabha
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लड़कियों की ज़िन्दगी क्या सच में दुरूह होती है ?क्या सच में उसका नसीब खराब होता है ?यदि यही सत्य है तो मत पढ़ाओ उसे !यदि उसे समय पर गरजना नहीं बता सकते तो सहनशीलता का सबक मत सिखाओ यह अधिकार रत्ती भर भी तुम्हारा नहीं  … माता-पिता हो जाने स...
rashmi prabha
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एक चवन्नी बोई थी मैंने,चुराई नहीं,पापा-अम्मा की थी,बस उठाई और उसे बो दियाइस उम्मीद मेंकि खूब बड़ा पेड़ होगाऔर ढेर सारी चवन्नियाँ लगेंगी उसमेंफिर मैं तोड़ तोड़कर सबको बांटूंगी ...सबको ज़रूरत थी पैसों कीऔर मेरे भीतर प्यार थातो जब तक मासूमियत रहीबोती गई -इकन्नी,दुअन्नी,चवन...
समीर लाल
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काश!! आशा पर आकाश के बदले देश टिका होता!! वैसे सही मायने में, टिका तो आशा पर ही है.जिन्दगी की दृष्टावलि उतनी हसीन नहीं होती जितनी फिल्मों में दिखती है. इसमें बैकग्राऊंड म्यूजिक म्यूट होता है, वरना तो जाने कब के गाँव जाकर बस गये होते. मुल्ला मचान पर बैठे, खेतों में...
rashmi prabha
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मेसेज करते हुएगीत गाते हुएकुछ लिखते पढ़ते हुएदिनचर्या कोबखूबी निभाते हुएमुझे खुद यह भ्रम होता हैकि मैं ठीक हूँ !लेकिन ध्यान से देखो,मेरे गले में कुछ अटका है,दिमाग और मन केबहुत से हिस्सों मेंरक्त का थक्का जमा है ।. ..सोचने लगी हूँ अनवरतकि खामोशी की थोड़ी लम्बी चादर ले...
समीर लाल
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यूँ तो गुजरता जाता है हर लम्हा इक बरस,दिल न जाने क्यूँ दिसम्बर की राह तकता है..तिवारी जी आदतन अक्टूबर खतम होते होते एक उदासीन और बैरागी प्राणी से हो जाते हैं. किसी भी कार्य में कोई उत्साह नहीं. कहते हैं कि अब ये साल तो खत्म होने को है, अब क्या होना जाना है. अब अगले...
rashmi prabha
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धू धू जलती हुई जब मैं राख हुईतब उसकी छोटी छोटी चिंगारियों ने मुझे बताया,बाकी है मेरा अस्तित्व,और मैं चटकने लगी,संकल्प ले हम एक हो गए,बिल्कुल एक मशाल की तरह,फिर बढ़ चले उस अनिश्चित दिशा में,जो निश्चित पहचान बन जाए ।मैं  नारी,धरती पर गिरकर,धरती में समाहित होकर,बं...
rashmi prabha
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बेटी,यदि तुम सूरज बनोगीतो तुम्हारे तेज को लोग बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे,वे ज़रूरत भर धूप लेकर,तुम्हारे अस्त होने की प्रतीक्षा करेंगे ।सुबह से शाम तकएक ज़रूरत हो तुम ।जागरण का गीत हो तुम,दिनचर्या का आरम्भ हो तुम,गोधूलि का सौंदर्य हो तुम,घर लौटने का संदेश हो तुम ...फिर भ...
समीर लाल
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कल ही पोता लौटा है दिल्ली से घूम कर. अपने कुछ दोस्तों के साथ गया था दो दिन के लिए.सुना उपर अपने कमरे में बैठा है अनशन पर कि यदि मोटर साईकिल खरीद कर न दी गई तो खाना नहीं खायेगा. जब तक मोटर साईकिल लाने का पक्का वादा नहीं हो जाता, अनशन जारी रहेगा.माँ समझा कर थक गई कि...