ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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सुनो प्रिये !मैं बहुत नाराज़ हूँ आपसेआपने आज फिर भेज दियेचार लाल गुलाब के सुन्दर फूलप्यारे कोमल सुप्रभात संदेश के साथमाना कि ये वर्चुअल हैं / नक़ली हैं लेकिन इनमें समायाप्यार का एहसास / महक तो असली हैनादाँ हूँ / प्रकृतिप्रेमी हूँ  / कवि हूँकदाचित...
Yashoda Agrawal
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कभी सोचता है उलझनों में घिरा मनक्या ठहर गया है वक्त ? नहीं,वक्त वैसे ही भाग रहा हैकुछ ठहरा है तो वो है मन,मन ही कर देता है कमअपनी गति कोऔर करता है महसूसठहरे हुए वक्त कोउसे नज़र आती हैं सारीजिज्ञासायें उसी वक्त में,सारीनिराशायें उसी वक्त मेंपर ठहरा हुआ मन अचानक-हो उ...
संजीव तिवारी
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छत्तीसगढ़ के ख्‍यातिलब्ध रंग निर्देशक राम ह्रदय तिवारी जी की रंग यात्रा का समग्र अभी हाल ही में, लोक रंगकर्मी दीपक चंद्राकर के द्वारा, राजेंद्र सोनभद्र के संपादन में प्रकाशित हुआ है। सात सर्गों में विभक्त इस ग्रंथ में राम ह्रदय तिवारी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व,...
अमितेश कुमार
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नाटक एक ऐसा माध्यम है जिसका दर्शक अभिन्न आंतरिक अंग है. अन्य कला के भावकों की तरह, या साहित्य के पाठक की तरह वह बाहरी नहीं है. नाट्य प्रस्तुति को संभव करने में नाटककार, अभिनेता, निर्देशक, पार्श्वकर्मी के साथ दर्शक भी जरूरी है. कहा भी जाता है कि एक अभिनेता और ए...
 पोस्ट लेवल : सहृदय Audience दर्शक
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ******************************************************हृदय रोग मे :ॐ ...... भू ....... भुवाः ...... स्वः.... तत्स्वितुर्वरेनियम भर्गों देवस्य धीमहि।...
विजय राजबली माथुर
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Bhavna  Pathak
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आजकल के इंटरनेट युग में छोटे छोेटे बच्चे बड़े बड़ों के कान काटते हैं। पहले ऐसा न था। बच्चे तो बच्चे बड़े भी सीधे- साधे सरल हृदय वाले होते थे। यह कहानी उसी जमाने की है। एक गांव में भोलानाथ नाम का युवक रहता था। वह सिर्फ नाम का ही भोला न था बल्कि सचमुच में ही वह बड़ा...
विजय राजबली माथुर
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विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं➡ लौंग (Clove) : सिर्फ 1 लौंग का सेवन आपके जीवन में कितना महत्त्वपूर्ण हो सकता है जिसकी आपने कभी कल्पना नही की होगी, आज हम आपको Allayurvedi...
anup sethi
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हृदयेश जी को विनम्र श्रद्धांजलिकई बरस पहले हृदयेश जी जब मुंबई आए थे, जीतेंद्र भाटिया और सुधा अरोड़ा ने अपनी वसुंधरा में उनका कहानी पाठ रखा था। गोष्ठी के बाद मैंने एक कविता लिखी, जो हृदयेश जी को समर्पित की। उन्हें भेजी और उनका आशीर्वाद भी मिला। उनकी याद में यहा...
 पोस्ट लेवल : हृदयेश कविता