कभी सोचता है उलझनों में घिरा मनक्या ठहर गया है वक्त ? नहीं,वक्त वैसे ही भाग रहा हैकुछ ठहरा है तो वो है मन,मन ही कर देता है कमअपनी गति कोऔर करता है महसूसठहरे हुए वक्त कोउसे नज़र आती हैं सारीजिज्ञासायें उसी वक्त में,सारीनिराशायें उसी वक्त मेंपर ठहरा हुआ मन अचानक-हो उ...