ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आज अभी-अभी बैठे-बिठाए हिन्दी फिल्म छिछोरे देखने को मिली. पूरी फिल्म तो नहीं बस अंत की लगभग बीस-पच्चीस मिनट की. इस फिल्म के बारे में सुन रखा था कि हॉस्टल लाइफ के बारे में है, कॉलेज की कहानी है मगर कभी देखने की न तो इच्छा हुई और न ही देखने का मौका लगा. ऐसा इसलिए क्यो...
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उस रात राकेश भाईसाहब के हाथ की टॉर्च एकदम से बंद हो गई. पता नहीं ये टॉर्च की गलती थी या फिर भाईसाहब की घबराहट. भाईसाहब तो पहले से ही वहाँ जाने से घबरा रहे थे. वैसे डराया तो हम सभी को गया था, किसी न किसी रूप में मगर जैसे एक सनक थी वहाँ जाने की. और वहाँ पहुँचकर कुछ द...
 पोस्ट लेवल : भूत संस्मरण हॉस्टल
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तुमसे ही ताकत हम सबकी, तुमसे ही हिम्मत हम सबकी. जीवन को जीना सिखा दिया,तुम जान बने हो हम सबकी.सुख-दुःख सीखें हँसना तुमसे, खुशियों को तुमसे ख़ुशी मिले,धरती, सूरज, चंदा तारे सब, रोशन होना तुमसे सीख रहे,खिलना है सबको सिखा दिया,तुम आन बने हो हम सबकी.खुद में खुद का विश्व...
 पोस्ट लेवल : कविता हॉस्टल Hostel दोस्ती
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रात गहरा चुकी थी और हम मित्रों द्वारा बातों के बताशे बनाने भी बन्द किये जा चुके थे, सो नींद के आगोश में मजबूरीवश जाना ही था. सभी ने विदा ली और अपने-अपने कमरों की ओर चल दिये. ठण्ड के दिन होने के कारण रजाई में घुसते ही नींद ने अपना असर दिखाना शुरू किया. लेटते ही नींद...
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ज़िन्दगी उतनी भी हसीन नहीं जितनी हम समझते हैं और मौत उतनी भी भयानक नहीं जितनी हमने मान रखा है. ऐसा अपने अनुभव के आधार पर ही कहा जा सकता है. ऐसा सिर्फ हम ही नहीं कह रहे, ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसने जिन्दगी को करीब से जिया है, महसूस किया है वह समझ सकता है. असल में हममें...
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मौत से कई बार ठनी और हर बार मौत को सामने से वार करने की चुनौती देकर वापस लौटाते रहे. इस बार फिर मौत से ठनी. इस बार की ठना-ठनी कुछ गंभीरता से हो गई. अबकी न मौत वापस जाने को तैयार दिखी और न ही राजनीति के अजातशत्रु हारने को राजी हुए. भाजपा के ही नहीं वरन राजनीति के भी...
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ज़िन्दगी अनिश्चय से भरी होती है, ये बहुत पहले से सुनते आये हैं. कब किसके साथ क्या गुजरे कहा नहीं जा सकता है, ये भी सत्य है. आने वाले कल का कोई भरोसा नहीं रहता है यह भी अपने आपमें सत्य है. ऐसे में क्या किया जाये, क्या ज़िन्दगी को बिना किसी परवाह के खुला छोड़ दिया जाये?...
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आठ अप्रैल निकल गई. निकल गया एक पूरा साल जबकि कई सालों का जीवन एकसाथ हँसते-गाते बिताया गया. हॉस्टल के सभी भाई सपरिवार बरसों बाद मिले. यादें ताजा की गईं, परिवार के सदस्यों को अपने उस जीवन का अनुभव कराया गया, जो बिंदास, अलमस्त होकर जिया गया. उसी अवसर पर याद आई वो इमार...
kumarendra singh sengar
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किसी समय हॉस्टल में सर्वाधिक प्रिय रहे और हॉस्टल छोड़ने के बाद भी बराबर अपने साथियों, अपने बड़े-छोटे भाइयों में लोकप्रिय रहे श्री सोमेन्द्र सिंह को आज भी कोई भूल नहीं पाया है. हो सकता है कि आज उनके साथ पढ़े, साथ खेले, साथ शरारतें करने वाले उनके साथी सहजता से न पहचान प...
kumarendra singh sengar
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समय ब्लैक एंड व्हाइट के ज़माने से रंगीन से गुजरता हुआ बहुरंगी होता चला गया. विकास की दौड़ में शामिल होकर श्रव्य के साथ दृश्य भी जुड़ते चले गए. एकमात्र चैनल के मनोरंजन से सजे भारी-भरकम टीवी की दुनिया असंख्य चैनलों के साथ स्लिम से स्लिम टीवी के साथ आगे बढ़ती रही. वीडियो...
 पोस्ट लेवल : मधुबाला हॉस्टल