ब्लॉगसेतु

हिमांशु पाण्डेय
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जग चाहे किसी महल में अपने वैभव पर इतराए या फिर कोई स्वयं सिद्ध बन अपनी अपनी गाए मौन खड़ी सुषमा निर्झर की बिखराये मादक रुन-झुन तुम्हीं मिलो, रंग दूँ तुमको, मन जाए मेरा फागुन।  यूँ तो ऋतु वसन्त में खग-कुल अनगिन राग सुनाता आम्र बौर छूकर सम...
 पोस्ट लेवल : Holi होली फागुन फाग
आचार्य  प्रताप
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#दोहेजोगिरा  सारारारारा जोगिरा  सारारारारा -------------------------------------------नयन सरोवर सम प्रिये , रक्तिम अधर कपोल। केश सुसज्जित देखकर , मन जाता है डोल।।०१।।जोगिरा  सारारारारा जोगिरा  सारारारारा -------मृगनयनी मीन-आक्षी ,...
 पोस्ट लेवल : दोहे दोहा होली
mahendra verma
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                     होली की मान्यता लोकपर्व के रूप में अधिक है किन्तु प्राचीन संस्कृत-शास्त्रों में इस पर्व का विपुल उल्लेख मिलता है । भविष्य पुराण में तो होली को...
sanjiv verma salil
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फाग-नवगीतसंजीव.राधे! आओ, कान्हा टेरेंलगा रहे पग-फेरे,राधे! आओ कान्हा टेरें.मंद-मंद मुस्कायें सखियाँमंद-मंद मुस्कायेंमंद-मंद मुस्कायें,राधे बाँकें नैन तरेरें.गूझा खांय, दिखायें ठेंगा,गूझा खांय दिखायेंगूझा खांय दिखायें,सब मिल रास रचायें घेरें.विजया घोल पिलायें छिप-छि...
 पोस्ट लेवल : नवगीत होली फाग
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:शब्द-शब्द अनुभूतियाँ, अक्षर-अक्षर भाव.नाद, थाप, सुर, ताल से, मिटते सकल अभाव..*सलिल साधना स्नेह की, सच्ची पूजा जान.प्रति पल कर निष्काम तू, जीवन हो रस-खान..*उसको ही रस-निधि मिले, जो होता रस-लीन.पान न रस का अन्य को, करने दे रस-हीन..*दोहा पिचकारी लियेसंजीव '...
 पोस्ट लेवल : दोहा सलिला लय रस होली
sanjiv verma salil
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त्रिभंगी छंद:संजीव 'सलिल'*ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।२१.३.२०१३ *http://divyanarmada.blogspot.in...
sanjiv verma salil
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मुक्तिका:                                          &nbs...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका होली
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मुखपृष्ठसाहित्यकारों की वेबपत्रिकावर्ष: 4, अंक 81, मार्च(द्वितीय), 2020देख तमाशा होली काडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"मस्त फुहारें लेकर आया,मौसम हँसी-ठिठोली का।देख तमाशा होली का।।उड़ रहे पीले-हरे गुलाल,हुआ है धरती-अम्बर लाल,भरे गुझिया-मठरी के थाल,चमकते रंग-बिरंगे गाल...
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विषय - होलीविधा - चौपाई छन्दछुप छुप करके मोहन आएजल भर गगरी वह छलकाएबढ़चढ़ ग्वाले हिस्सा लीनी गोपी को भी वो रंग दीनीसखियाँ लाई सुंदर मालागले राधिका के है डालाबरसाने की सब नर नारीरंगभरी लाए पिचकारीनटखट राधा पनघट आईपायलिया छम छम छमकाईमुड़ मुड़ कर के श्याम निहारेप...
संतोष त्रिवेदी
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होली से ठीक पहले शहर में शांति स्थापित हो गई।इसमें दंगों की ख़ास भूमिका रही।अगर ये बड़े पैमाने पर न हुए होते तो शहर में शांति स्थापित करने में व्यावहारिक दिक्कतें आतीं।अब सारा माहौल अमन और भाईचारे की चपेट में है।घर भले ही खंडहर में तब्दील हो गए हों,चैनलों में दिन-र...