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अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
अनीता सैनी
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ख़ामोशी से बातें करता था न जाने  क्यों लाचारी है  किपसीने की बूँद की तरह टपक ही जाती थी अंतरमन में उठता द्वंद्व ललाट पर सलवटें  आँखों में बेलौस बेचैनी छोड़ ही जाती थी दूध में कभी पानी की मात्रा कभी दूध...
Sandhya Sharma
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 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
मुकेश कुमार
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1.खामोशियाँ तब भी थीथी शांत जल धाराशांत थे उसमे तैरतेछोटी-बड़ी मछलियाँप्रॉन, कछुए और केंकड़े भी शांत थी व्हेल भीजब वो पीछे से आयी, थी मुंह बायेऔर फिर आया भूचालकोलाहल अजब गजबकुछ शांत जीवों के लिए ........फिर से शांत हो गया सब कुछकभी कभी नीरवता बन जाती है 'शांति'!...
सुमन कपूर
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..ज़ख्मों को कुरेदती हूँ तो दर्द सकून देता है !!सु-मन 
सुमन कपूर
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छलता है 'मन' यूँ ही मुझको बारहा लफ्ज़ों से फिर बेरुखी छलकने लगती है !!सु-मन 
सुमन कपूर
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तमाम खुशियों के बावजूद गम हरा है अभीजिंदगी की सूखी सतह पर नमी बाकी है शायद ।।सु-मन 
सुमन कपूर
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असल में हम अपने ही कहे शब्दों से धोखा खाते हैं और हमारे शब्द हमारी चाह से ।हम सब धोखेबाज़ हैं खुद अपने !!सु-मन
सुमन कपूर
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शाम खामोश होने को है और रात गुफ्तगू करने को आतुर ... इस छत पर काफी शामें ऐसी ही बीत जाती हैं ...आसमां को तकते हुए .... सामने पहाड़ी पर वो पेड़ आवाज लगाते हैं ..कुछ उड़ते परिदों को ..आओ ! बसेरा मिलेगा तुम्हें ..पर परिंदे उड़ जाते हैं दूर उस ओर ... अपने साथी संग .. सुनसा...
सुमन कपूर
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                         दोस्त वह जो जरूरत* पर काम आये ।                         सोच में हूँ कि मैं / हम जरूरत का सामान हैं । जरूरत पड़ी...