ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
30
ख़ुशी की चाह सबको है मगर उसे पाने का, तलाशने का तरीका बहुत से लोगों को पता ही नहीं. पहली बात तो ये कि अभी बहुत से लोगों को इसका ही पता नहीं कि ख़ुशी आखिर है क्या? उन्हें तो इसका भी भान नहीं कि उनके लिए ख़ुशी क्या है? ऐसे लोग बस दूसरे के चेहरे की प्रसन्नता को, उसकी भौत...
मुकेश कुमार
212
मान लो 'आग'टाटा नमक केआयोडाइज्ड पैक्ड थैली की तरहखुले आम बिकती बाजार मेंमान लो 'दर्द'वैक्सड माचिस के डिब्बी की तरहपनवाड़ी के दूकान पर मिलतीअठन्नी में एक !मान लो 'खुशियाँ' मिलतीसमुद्री लहरों के साथ मुफ्त मेंकंडीशन एप्लाय के साथ किहर उछलते ज्वार के साथ आतीतो लौट भी जा...
kumarendra singh sengar
30
अपने कॉलेज आने-जाने के क्रम में, नियमित शहर टहलने के क्रम में अक्सर ऐसे बच्चों से मिलना हो जाता है. बहुत से लोग ऐसे बच्चों को देखकर उनसे बचते हुए निकल जाते हैं. बहुत से लोग हैं जो इनको डाँटते-फटकारते हुए भी आगे बढ़ते हैं. समझ नहीं आया कि आखिर इन बच्चों को डाँटने-फटक...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
295
ख़ुशी आयीख़ुशी चली गयी ख़ुशी आख़िर ठहरती क्यों नहीं ?आँख की चमक मनमोहक हुई कुछ देर के लिये फिर वही रूखा रुआँसापनग़म आता है जगह बनाता है ठहर जाता है बेशर्मी सेज़िन्दगी को बोझिल बनाने भारी क़दमों से दुरूह सफ़र ...
sanjiv verma salil
6
दोहा सलिला: *हर्ष; खुशी; उल्लास; सुख, या आनंद-प्रमोद। हैं आकाश-कुसुम 'सलिल', अब आल्हाद विनोद।।*कहीं न हैपीनेस है, हुआ लापता जॉय।हाथों में हालात के, ह्युमन बीइंग टॉय।।*एक दूसरे से मिलें, जब मन जाए झूम। तब जीवन का अर्थ हो, सही हमें मालूम।। * मेरे अधरों पर खिले,...
मुकेश कुमार
212
कुछ टॉफियों के रैपर सेनिकाल कर गटक ली थीलाल पिली नारंगी टॉफियाँफिर सहेज लिए रैपर्स, जिसमे थास्वाद, खुशियाँ, प्यारआज पुराने किताबों से झांकतेये चटक रंगों के रैपर्सएक पल को बोल गये ''धप्पा"पलकें झपकाते हुएमुस्काते चेहरे के साथहूँ अब तक विस्मृत !!~मुकेश~
 पोस्ट लेवल : रैपर POEM टॉफ़ी ख़ुशी प्यार
Yashoda Agrawal
238
कैसे दीपक ख़ुशी के जलाऊँ पिया,बिन तेरे आज खुशियाँ मनाऊँ पिया,सोलह शृंगार से तन सजा तो लिया ,संग तुम ले गये हो हमारा जिया, बनके दीपक मै जलती रही रात भर,एक पल भी हटी ना हमारी नजर,इस तरह घिर के आई थी काली घटा ,ऐसा लगता था जैसे ना होगी सहरकैसे दीपक ख़ुशी के जलाऊँ पिया,बि...
Nitu  Thakur
502
कैसे दीपक ख़ुशी के जलाऊँ पिया,बिन तेरे आज खुशियाँ मनाऊँ पिया,सोलह शृंगार से तन सजा तो लिया ,संग तुम ले गये हो हमारा जिया, बनके दीपक मै जलती रही रात भर,एक पल भी हटी ना हमारी नजर,इस तरह घिर के आई थी काली घटा ,ऐसा लगता था जैसे ना होगी सहरकैसे दीपक ख़ुशी के जलाऊँ पिया,बि...
मुकेश कुमार
212
दिवाली के दुसरे दिन प्रदूषित आसमानदिवाली  के दूसरे दिन की सुबहअजीब सी निरुत्साहित करने वाली सुबहचमकती रात के बाद बुझे-बुझे सूर्य के साथकुछ नहीं बुझी लड़ियों की दिखती ख़ामोशीबुझ चुके दीपक,  और पिघली मोमबत्तियांबिना चमक के हो चुकी होती है सुबह !!चारो और फैले...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
477
1 नवम्बर  2015 : हर स्थिति में सबको सम्मान देते चलें. घृणित भावनाओं से अपनी रक्षा करने के लिए दूसरों को सम्मान दीजिये. 2 नवम्बर  2015 : कभी-कभी सम्मान देना ही सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होता है. 3 नवम्बर  2015 : यदि कोई आप पर हंसता है तो खि...