ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
6
टाँग देती हैं, समय में सिमटी साँसें, ज़िंदगी की अलगनी पर,  कुछ बिन गूँथे ख़्वाब ख़्वाहिशों में सिमटे,   तोड़ देती हैं वे दम, कुछ झुलस जाते हैं वक़्त की धूप से, कुछ रौंद देते हैं हम अपने ही क़दमों से, कुछ पनप जाती हैं रोहि...
Ravindra Pandey
479
ज़िन्दगी के सुहाने सफर में यहाँ,फिसलन भरे मोड़ हालात के।जल रहा है बदन, धूनी की तरह,धुएँ उठ रहे, भीगे जज़्बात के।कसक को पिरोए, वो फिरता रहा,जिया भी कभी, या कि मरता रहा।सुनेगा भी कौन, दुपहरी की व्यथा,सब तलबगार रंगीन दिन-रात के।कोई तो साथ हो, पल भर के लिए,निभा पाया कौन उ...
लोकेश नशीने
551
【1】जब भी किया नींद नेतेरे ख़्वाबों का आलिंगनऔर आँखों ने चूमा हैतेरी ख़ुश्बू के लबों कोतब मुस्कुरा उट्ठा हैमेरे ज़िस्म का रोंया रोंयाचित्र साभार- गूगल【2】न जानेकितनी ही रातें गुजारी है मैंनेतेरे ख़्यालों मेंउस ख़्वाब के आगोश मेंजिसकी ताबीर* हो नहीं सकतीअक्सर आ बैठते हैं...
सुमन कपूर
393
देर रात चाँद सोता रहा पलकों तलेचाँदनी तेरे ख्वाब को शबनमी करती रही !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : चाँदनी ख़्वाब
Ravindra Pandey
479
मैं सोचता हूँ, एक ख़्वाब बुनूं,हीरे-मोती, माहताब चुनूं...दिखला दूं, कौन हूँ! दुनियाँ को,मन में अक्सर यही बात गुनूं...क्यों बरखा भाए मधुबन को,शीतल कर जाए तन-मन को,भीगेगीं अल्हड़ पंखुड़ियाँ,उस पल बूंदों का राग सुनूं...मैं सोचता हूँ...जब पनिहारिन पनघट जाए,गागर में सागर भ...
Yashoda Agrawal
8
पूछो न बिना तुम्हारे कैसे सुबह से शाम हुईपी-पीकर जाम यादों के ज़िंदगी नीलाम हुईदर्द से लबरेज़ हुआ कोरा काग़ज़ दिल कालड़खड़ाती हर साँस ख़ुमारी में बदनाम हुईइंतज़ार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशातमाम कोशिशें सबको पाने की सरेआम हुईक्या कहूँ वो वादा-ए-दस्तूर  निभा न सके&n...
Yashoda Agrawal
236
अब नहीं देखता ख़्वाब मैं रातों को,रातों में पलकें झपकाना भी भूल गया।दिये हैं जालिम तुमने ज़ख़्म इतने कि,ज़ख़्मों पर अब मरहम लगाना भूल गया।वक़्तो गुज़र जाता है तन्हां इस कदर कि,बीते वक़्तत का हिसाब लगाना भूल गया।तेरी बेवफ़ाई के सहारे ज़िन्दा हूँ या नहीं,ज़िन्दगी के अंतिम साँसे...
anamika ghatak
284
अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहींउसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद हैकर भी लूँ नींदों से वाबस्ताख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है  रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जोघूँट पानी का न उतरा हद हैकर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमनेहुए फिर भी बदनाम हद हैदो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के च...
लोकेश नशीने
551
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); दिल की उम्मीदों को सीने में छिपाए रक्खाइन चिरागों को हवाओं से बचाए रक्खाहमसे मायूस होके लौट गई तन्हाई भीहमने खुद को तेरी यादों में डुबाए रक्खातिरे ख़्याल ने दिन-रात मुझे सताया हैहुई जो रात तो ख़्वाबों ने जगाए र...
लोकेश नशीने
551
बिछड़ते वक़्त तेरे अश्क़ का हर इक क़तरालिपट के रास्ते से मेरे तरबतर निकलाखुशी से दर्द की आँखों में आ गए आंसूमिला जो शख़्स वो ख़्वाबों का हमसफ़र निकला (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); रोज दाने बिखेरता है जो परिंदों कोउसके तहख़ाने से कटा हुआ शजर निकला...