ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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टाँग देती हैं, समय में सिमटी साँसें, ज़िंदगी की अलगनी पर,  कुछ बिन गूँथे ख़्वाब ख़्वाहिशों में सिमटे,   तोड़ देती हैं वे दम, कुछ झुलस जाते हैं वक़्त की धूप से, कुछ रौंद देते हैं हम अपने ही क़दमों से, कुछ पनप जाती हैं रोहि...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                                   "सूनें वीरानों में कभी-...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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ये          कहाँ         से आ        गयी     बहार   है  ,बंद                     तोमेरी   गली   का  द्वार...
सुमन कपूर
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‘समर्पण की पराकाष्ठा ही शायद उपेक्षा के बीज अंकुरित करती है और कविता को विस्तार भी यहीं से प्राप्त होता है |’निवेदिता दी और अमित जीजू द्वारा लिखी कविताओं की पुस्तक ‘कुछ ख़्वाब कुछ ख़्वाहिशें’ में पाठकों के लिए लिखे शब्दों ये पंक्तियाँ मन को छू गई | समर्पण और उपेक्षा...
सुमन कपूर
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भर भर खाली होता गया ख्वाहिशों का मयखाना बूँद बूँद अश्क होती गयी हसरतों की बारिश !!सु-मन 
सुमन कपूर
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जाने किस नम कोने में दबी हैं ख़्वाहिशें गल रही हैं पर पनपती नहीं !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : ख़्वाहिशें
Kailash Sharma
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रश्मि प्रभा जी और किशोर खोरेन्द्र जी द्वारा संपादित काव्य-संग्रह 'बालार्क' में सामिल मेरी रचनाओं में से एक रचना                                           ...