ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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मीलों दूर तक पसरे हुए ये रास्तेकभी कभी बोझिल हो जाते हैं कदम जाने पहचाने रास्तों को देर नहीं लगती अजनबी बनने में जब सफर होता है तन्हाऔर मंज़िलें होती गुमरौशनी में नहाये हुए बाज़ार रौनकों से सजी हुई दुकाने पर मैं कुछ अलहदा ढूंढ़ रही हूँ खर...
डॉ शिव राज  शर्मा
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मैं शायर नहीं हूँ, बस ऐसा लगता है दोस्तों ।के मेरी बातों में दर्दे दिल झलकता है दोस्तों ।तुम छुपा जाते हो दर्द, या है ही नहीं कोई ।मैं तो दिखा देता हूँ मेरे सारे ज़ख्म दोस्तों ।----शिवराज--------
 पोस्ट लेवल : शायर दर्द ए दिल ज़ख्म