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sanjiv verma salil
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बाल गीत / नव गीत:ज़िंदगी के मानीसंजीव 'सलिल'* खोल झरोखा, झाँक-ज़िंदगी के मानी मिल जायेंगे.मेघ बजेंगे, पवन बहेगा,पत्ते नृत्य दिखायेंगे.....* बाल सूर्य के संग ऊषा आ,शुभ प्रभात कह जाएगी.चूँ-चूँ-चूँ-चूँ कर गौरैयारोज प्रभाती गायेगी..टिट-टिट-टिट-टिट करे टिटहरी, करे कब...
अनीता सैनी
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 मृगमरीचिका-सी भ्रम जाल फैलाती  धूप-सी जलाती है ज़िंदगी।कभी बरसात बन भिगोती पेड़-सा आसरा बनती है ज़िंदगी।सँकरी गलियों के मोड़-सी लगती कभी राह दिखाती हाथ बढ़ाती है।घनघोर निराशा में पीठ थपथपाती उत्साह भरती तुम्हारी छाया-सी है ज़िंदगी।&nbs...
जेन्नी  शबनम
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फ़ितरत  *******  थोड़ा फ़लसफ़ा थोड़ी उम्मीद लेकर  चलो फिर से शुरू हुई करते हैं सफर  जिसे छोड़ा था हमने तब, जब  जिंदगी बहुत बेतरतीब हो गई थी  और दूरी ही महज़ एक राह बची थी  साथ न चलने और साथ न जीने के ल...
 पोस्ट लेवल : ज़िंदगी
जेन्नी  शबनम
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ऑक्सीजन *******  मेरे पुरसुकून जीवन के वास्ते  तुम्हारा सुझाव -  जीवन जीने के लिए प्रेम  प्रेम करने के लिए साँसें  साँसें भरने के लिए ऑक्सीजन  ऑक्सीजन है प्रेम  और वह प्रेम मैं तलाशूँ, ...
 पोस्ट लेवल : ज़िंदगी प्रेम
जेन्नी  शबनम
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जो देखा जो सुना   *******   जो देखा जो सुना   जो जिया जो गुना   वह लिखा वह सब लिखा   जो मन ने कहा   जो मन में पला   वह लिखा बस वही लिखा   कब कौन सी विधा हुई   किस तराजू पे परख...
 पोस्ट लेवल : ज़िंदगी स्वयं
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
अनीता सैनी
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असबाब लादे रौबीले तन पर, यायावर मुस्कुराहट को मात दे गया,सजा सितारे सान से सीने  पर,    सपनों का सौदागर सादगी में सिमट गया |  आसमां की छात्रछाया उसका मन मोह गयी,   देह के उसको  मटमैला लिबास भा गया,  नींद क...
Kailash Sharma
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यादों में जब भी हैं आती बेटियां,आँखों को नम हैं कर जाती बेटियां।आती हैं स्वप्न में बन के ज़िंदगी,दिन होते ही हैं गुम जाती बेटियां।कहते हैं क्यूँ अमानत हैं और की,दिल से सुदूर हैं कब जाती बेटियां।सोचा न था कि होंगे इतने फासले,हो जाएंगी कब अनजानी बेटियां।होंगी कुछ तो म...
Sanjay  Grover
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ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी ल...
Nitu  Thakur
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मेरा अक्स आज मुझसे , नजरें चुरा रहा है कल तक जो जान था वो , अब दूर जा रहा है किस बात से खफा है , जो आज यूँ जुदा है आँखों को ख्वाब देकर , खुद ही मिटा रहा है माना ये दिल नही था , तेरी आरजू में शामिल दिले बेरुखी से अपनी , उसे क्यों जला रहा है&...