ब्लॉगसेतु

ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                   "तैरतीं ख़्वाहिशें" भाग 'पाँच'  "तैरतीं ख़्वाहिशें"आज़ मैं फिर सपनें देखता हू...