ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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जैसा कि आप सबसे आज, 19 मार्च के लिए कहा था, ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद का ऑनलाइन प्रकाशन आज से आरम्भ कर दिया है. ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद से जुड़ने के लिए आपको इसके ब्लॉग पर जाना होगा या फिर इसके पेज पर. इसका प्रकाशन वहीं पर किया जायेगा. ब्लॉग और फेसबुक पेज की लिंक नीचे ह...
kumarendra singh sengar
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आगामी पुस्तक ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद जल्द ही ऑनलाइन आएगी. यदि सबकुछ यथावत रहा तो इसी महीने की 19 तारीख से. इसे ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद ब्लॉग पर और ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद फेसबुक पेज पर प्रकाशित किया जायेगा. आरंभिक दो-चार पोस्ट हम अपनी फेसबुक वॉल पर और इस ब्लॉग पर शेयर करें...
 पोस्ट लेवल : ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद
Manav Mehta
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बरसों पहलेएक खेल खेला करते थे हम लोगविष- अमृत नाम था शायद...!!भागते - भागते जब कोईछू लेता था किसी कोतो विष कहा जाता थाऔर वो एक टक पुतले के जैसेरुक जाता था....ना हिलता था ना कुछ बोल पाता था...फिर जब कोई और उसे छू लेता तोअमृत बन जाता थाखेलता था पहले के जैसेभागता था.....
kumarendra singh sengar
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प्रकृति ने जितने रंग अपने में समाहित कर रखे हैं, वे सभी इस ज़िन्दगी में देखने को मिल जाते हैं. इन रंगों में हँसी के, ख़ुशी के, रोने के, ग़म के, याद रखने के, भूलने के, अपनों के, गैरों के, जीत के, हार के आदि-आदि समाहित रहते हैं. इन रंगों के साथ सह-सम्बन्ध बनाकर खुद को र...
kumarendra singh sengar
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आज शाम एकाएक अपने स्वभाव को लेकर, हमारे साथ जुड़े हुए लोगों के स्वभाव को लेकर अपने में विमर्श शुरू हुआ. बहुत से जाने-पहचाने चेहरे नजर के सामने आकर धुँधले हो गए. ऐसे चेहरे भी अब साफ़ नहीं दिखाई दे रहे थे, जिनको कभी अपने से दूर देखना नहीं सोचा था. समझ नहीं आया कि ऐसा ह...
 पोस्ट लेवल : दोस्त दोस्ती ज़िन्दगी
kumarendra singh sengar
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पिछले साल इन्हीं दिनों एक बहुत बड़े से कार्यक्रम का हिस्सा बने हए थे. उसी समय एक बहुत ही बुरी खबर सुनने को मिली थी. कार्यक्रम में चेहरे पर मुस्कराहट लाकर लोगों से मिलने की विवशता और दिल में उस बुरी खबर के चलते उठती दुःख की लहर. दोनों के बीच संतुलन बैठाना और दोनों स्...
 पोस्ट लेवल : सुख-दुःख जीवन ज़िन्दगी
kumarendra singh sengar
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बीते दिनों से छुटकारा पाना आसान नहीं होता है. उन दिनों की बातें, उनकी यादें किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती हैं. ये यादें कभी हँसाती हैं तो कभी रुलाती हैं. दिल-दिमाग खूब कोशिश करें कि पुरानी बातों को याद न किया जाये मगर कोई न कोई घटना ऐसी हो ही जाती है कि इन या...
जेन्नी  शबनम
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धरोहर   *******   मेरी धरोहरों में कई ऐसी चीज़ें हैं   जो मुझे बयान करती हैं   मेरी पहचान करती हैं   कुछ पुस्तकें जिनमें लेखकों के हस्ताक्षर   और मेरे लिए कुछ संदेश है   कुछ यादगार कपड़े जिसे मैं...
जेन्नी  शबनम
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गुम सवाल   ******   ज़िन्दगी जब भी सवालों में उलझी   मिल न पाया कोई माकूल जवाब   फिर ठठाकर हँस पड़ी   और गुम कर दिया सवालों को   जैसे वादियों में कोई पत्थर उछाल दे।   - जेन्नी शबनम (26. 9. 2019)__...
 पोस्ट लेवल : व्यथा ज़िन्दगी
kumarendra singh sengar
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इधर कई महीनों से कुछ लिखने का मन नहीं हो रहा है. ब्लॉग पर किसी तरह की बंदिश नहीं है इसलिए कुछ न कुछ थोडा बहुत लिख देते हैं. इसी न लिखने की मानसिकता के चलते न तो समाचार-पत्रों में कोई आलेख भेजा है और न ही किसी पत्रिका में. इस दौरान लगातार पढ़ना हो रहा है. आदत भी ऐसी...