ब्लॉगसेतु

जेन्नी  शबनम
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आकुल ******* 1. जीवन जब आकुल है   राह नहीं दिखती   मन होता व्याकुल है।   2. हर बाट छलावा है   चलना ही होगा   पग-पग पर लावा है।   3. रूठे मेरे सपने   अब कैसे जीना&nbs...
 पोस्ट लेवल : माहिया ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
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कहानियाँ  *******1.छोटे-छोटे लम्हों में   यादों की ढेरों कतरन हैं   सबको इकट्ठाकर   छोटी-छोटी कहानी रचती हूँ   अकेलेपन में   यादों से कहानियाँ निकल   मेरे चेहरे पे खिल जाती हैं।   2.&nb...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
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तकरार ******* आत्मा और बदन में तकरार जारी है,   बदन छोड़कर जाने को आत्मा उतावली है   पर बदन हार नहीं मान रहा   आत्मा को मुट्ठी से कसके भींचे हुए है   थक गया, मगर राह रोके हुए है।   मैं मूकदर्शक-स...
जेन्नी  शबनम
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दागते सवाल ******* यही तो कमाल है   सात समंदर पार किया, साथ समय को मात दी   फिर भी कहते हो -   हम साथ चलते नहीं हैं।   हर स्वप्न को, बड़े जतन से ज़मींदोज़ किया   टूटने की हद तक, ख़ुद को लुटा दिया   ...
 पोस्ट लेवल : व्यथा स्त्री ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
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जून 2019 की बात है, एक दिन हमारी ब्लॉगर मित्र श्रीमती रेखा श्रीवास्तव जी का सन्देश प्राप्त हुआ कि वे कुछ ब्लॉगारों के 'अधूरे सपनों की कसक' शीर्षक से अपने संपादन में एक पुस्तक प्रकाशन की योजना बना रही हैं; अतः मैं भी अपने अधूरे सपनों की कसक पुस्तक के लिए लिख भे...
kumarendra singh sengar
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ऐसा कहा जाता है कि हमारे कार्यों के अनुसार ही हमें फल प्राप्त होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि इस जन्म में व्यक्ति के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसमें बहुत कुछ पूर्व जन्म में किये गए कार्यों का प्रतिफल होता है. ऐसी बातों पर कभी विश्वास नहीं किया और न ही महत्त्व दिया. हम...
जेन्नी  शबनम
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चलते ही रहना ******* जीवन जैसे   अनसुलझी हुई   कोई पहेली   उलझाती है जैसे   भूल भूलैया,   कदम-कदम पे   पसरे काँटें   लहूलुहान पाँव   मन में छाले   फिर भी है बढ़ना&nbs...
 पोस्ट लेवल : चोका ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
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विदा ******* उम्र के बेहिसाब लम्हे   जाने कैसे ख़र्च हो गए    बदले में मिले ज़िन्दगी के छल   एकांत के अनेकों कठोर पल   जब न सुनने वाला कोई, न समझाने वाला कोई   न पास आने वाला, न दूर जाने वाला कोई ...
 पोस्ट लेवल : व्यथा ज़िन्दगी
kumarendra singh sengar
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ज़िन्दगी कितनी भी आसानी से गुजर रही हो मगर उसमें एक लहर ही बहुत है हिलोर उठाने को. आखिर ज़िन्दगी की झील में शांति क्यों नहीं रहती है? कभी वर्तमान, कभी अतीत आकर कोई न कोई हलचल मचा जाता है. इस हलचल में ज़िन्दगी की शांत झील में उथलपुथल मच जाती है. बहुत बार ऐसा होता है जब...
 पोस्ट लेवल : भूत भविष्य ज़िन्दगी
Roli Dixit
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'चांद आज साठ बरस का हो गया' इतना कहकर पापा ने ईंट की दीवार पर पीठ टिकाते हुए मेरी आंखों में कुछ पढ़ने की कोशिश की...'लेकिन मेरा चांद तो अभी एक साल का भी नहीं हुआ है' कहते हुए मैं पापा से लिपट गई.मेरी आंखों से रिस रहे आंसू बीते समय को जी रहे हैं. रोज शाम हम घर की छत...