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S.M. MAsoom
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google.load("elements", "1", {packages: "transliteration"}); मुहर्रमआते ही जगह जगह अज़ादारी के जुलुस इमाम हुसैन (अ.स ) और कर्बला के शहीदों की शहादत को याद करते हुए निकलने लगते हैं | इन जुलूसों में कर्बला में हुयी शहादत को याद करने के लिए प्रतीकात्...
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हज़रत मुहम्मद (स अ व ) के घोड़े का नाम  ज़ुल्जिनाह था जिसे उन्होंने एक अरबी  नाम हारिस से खरीदा था । ज़ुल्जिनाह का पहले नाम मुर्तज़िज़ था ।ज़ुल्जिनाह रन्नो जौनपुर ज़ुल्जिनाह पान दरीबा जौनपुर जब  इस ज़ुल्जिनाह  को खरीदा गया था तो इमाम हुसैन बहुत छोटे ( ४...
 पोस्ट लेवल : muharram ज़ुल्जिनाह
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हज़रत मुहम्मद (स अ व ) के घोड़े का नाम  ज़ुल्जिनाह था जिसे उन्होंने एक अरबी  नाम हारिस से खरीदा था । ज़ुल्जिनाह का पहले नाम मुर्तज़िज़ था ।ज़ुल्जिनाह रन्नो जौनपुर ज़ुल्जिनाह पान दरीबा जौनपुर जब  इस ज़ुल्जिनाह  को खरीदा गया था तो इमाम हुसैन बहुत छोटे ( ४...
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आज दो मुहर्रम को जौनपुर में सुबह से ही पंजे शरीफ जाने के लिए लोग सवारियां तलाशने लगते हैं मुहल्लों से जुलुस अलम का लिए अंजुमन वाले भी चल पड़ते हैं पंजे शरीफ की तरफ जहां पे आज 14 मासूमीन (अ.स) को खिचड़ी नज़र की जाती है | शाम तक वहाँ से लोग वापस लौटने लगते हैं और शह...
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शार्की बादशाहों ने जौनपुर में बहुत से इमामबाड़े ,रौज़े बनवाये जिसे देख के ऐसा लगता है की वो जौनपुर को बग़दाद की शक्ल देना चाहते थे और बहुत हद तक इसमें कामयाब भी थे | लेकिन इब्राहीम लोधी ने इसे तोड़ दाल और बहुत बर्बाद किया | फिर भी बहुत से रौज़े और इमामबाड़े आज भी बचे हुए...