तुम्हें मालूम है उस दरमियाँ, ख़ामोश-सी रहती कुछ पूछ रही होती है, मुस्कुराहट की आड़ में बिखेर रही शब्द, तुम्हारी याद में वह टूट रही होती है |बिखरे एहसासात बीन रही, उन लम्हात में वह जीवन में मधु घोल रही होती है,  नमक का दरिया बने नयन...