लाल, हरा, नीला, पीला, निखर रहे हैं रंग।मस्तानों की टोलियाँ,  फ़ाग में हुए मलंग।।भर पिचकारी घूम रहे,  बच्चे  चारों ओर।अनायास  बौछार  से,  राहगीर  सब दंग।।स्वप्नपरी के रूप में,  झूमें  हैं  चाचा आज।चाची गुझिया खिला रही...