ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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अल्फ़ाज़ है कुछ माज़ी के दिल कभी भूलता ही नहींनये-पुराने घाव भर गए सारे  दर्द-ओ-ग़म राह ढूँढ़ता ही नहीं। उम्र भर साथ चलने का वादा है अभी से लड़खड़ा गए हो क्यों ?प्यास बुझती कहां है इश्क़ में साहिल पे आज आ गए हो क्यों ?गर  न  हों&nbsp...
विजय कुमार सप्पत्ति
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मैंने अपने भीतर के मौन को सूनी रातो में जागकर शब्दों में बदला है . क्या तुम उन शब्दों में मौजूद मेरे मौन को सुन सकते हो . ये वो मौन है जो अब हमेशा हमारे दरमियान रहेगा ! दरअसल ये वो मौन भी है जो हज़ारो सालो से हम जैसो के दरमियान रहा है . मैं तो बस उस मौन की कश्ती क...
विजय कुमार सप्पत्ति
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कभी कभी जीतना ज्यादा जरुरी नही होता है ... जीना भी आना चाहिए ; और अक्सर प्रेम की राह पर जीते हुए हारा जाता है . हां ! सच्ची ! तुम्हारी कसम !!!
विजय कुमार सप्पत्ति
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मुझसे बिछड़ कर खुश रहते हो........................मेरी तरह तुम भी झूठे हो.....!!!!!
विजय कुमार सप्पत्ति
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.......और मैं अब भी उस बारिश का इन्तजार कर रहा हूँ.....धुंध के बादल अब वापस जाने लगे है ... सोचते रहता हूँ. कि ....कोई किसी आसमां से मेरा नाम तो लेकर पुकारे.............क्योंकि अब जीवन की  उदास राहे एक मरे हुए शरीर के बोझ को ढोते ढोते थक गयी है ............पर...
विजय कुमार सप्पत्ति
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मेरे उम्र के कुछ दिन , कभी तुम्हारे साडी में अटके तो कभी तुम्हारी चुनरी में ....कुछ राते इसी तरह से ; कभी तुम्हारे जिस्म में अटके तो कभी तुम्हारी साँसों में .....मेरे ज़िन्दगी के लम्हे बेचारे बहुत छोटे थे.वो अक्सर तुम्हारे होंठो पर ही रुक जाते थे. फिर उन लम्हों के...
विजय कुमार सप्पत्ति
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किसी साहिल पर मिलने का वादा करके तुम चली गयी थी .बड़े जन्म बीत गये ...मैं अब वही खड़ा हूँ. जहाँ तुम मुझे छोड़ गयी थी .न वो साहिल मिला और न ही तुम. ....!
विजय कुमार सप्पत्ति
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न होते फ़ासलों के शहर में हम,तो फिर मिलना बहुत आसान होता |-सरशार सिद्दीकी