जिस तरह की स्थितियाँ देश में, प्रदेश में बन रही हैं वे सारी की सारी किसी न किसी रूप में गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि तैयार कर रही हैं. विदेशों में हुई क्रांतियाँ इस तरह के सामाजिक वातावरण के बाद ही उत्पन्न हुई थी, जैसी कि स्थितियाँ भारतीय समाज में बन-बिगड़ रही हैं. यह बात...