ब्लॉगसेतु

usha kiran
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शादी की कई रस्मों में से एक मनभावन रस्म है पग फेरों की।नवब्याहता बेटी शादी के बाद जब पहली बार सजी- धजी दामाद संग मायके आती है तो कुछ अलग ही उल्लास व उछाह मन में व घर भर में छा जाता है।लॉन में दिसम्बर की  सुनहरी सी धूप में बेटी मनिका और दामाद शेखर बीनबैग में अध...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
अपर्णा त्रिपाठी
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ईश्वर से कुछ ना मांगें हम सब कुछ तुमसे पाया है राम सिया से मात पिता कीहम बच्चों पर छाया है तुम दोनो को संग में देख के मन हर्षित हो जाता है अद्भुद सी अनुपम जोडी को देख के मन यह गाता है युग युग तक आशीष मिले बसऔर नहीं कुछ पाना है&nbs...
सतीश सक्सेना
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रोज सुबह एकाग्रचित्त होकर टहलने / दौड़ने निकलना तभी संभव होगा जब आपमें एक धुन या जिद बन जाए कि मैंने मरते समय तक अपने शरीर को फुर्तीला बनाये रखना है यकीनन बीमारियां आपके खूबसूरत गठे हुए शरीर के निकट नहीं आएँगी , वे सिर्फ सुस्त शरीर के मालिकों को ही ढूंढती हैं ! मेडि...
 पोस्ट लेवल : healthblunders हेल्थ ब्लंडर
सतीश सक्सेना
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इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ रही है , काफी समय से दौड़ना बंद कर, आराम करने की मुद्रा में चल रहा हूँ ! हानिकारक मौसम में शरीर पर नाजायज जोर न पड़े इस कारण यह रेस्ट आवश्यक भी है मगर सम्पूर्ण आराम के दिनों खाने के चयन पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है ! अन्यथा ट्रकों के पीछे...
सतीश सक्सेना
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आज पूरे घर और कार की सफाई धुलाई के बाद का संतोष चेहरे पर साफ़ दिखता है ! मुझे याद है जब मैं 30-35 का था तब वृद्ध लोगों को आदर भाव से देखता था और सोंचता था कि इनकी मदद करनी चाहिए जबकि आज मैं सोचता हूँ कि इन जवानों की मदद करनी चाहिए ! प्रणाम आप सबको !अकर्मण्यता की आदत...
 पोस्ट लेवल : हेल्थ ब्लंडर
सतीश सक्सेना
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आपकी कॉलोनी एवं परिचितों में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं होगा जो वाक न करता हो , 40-45 के होते होते हर व्यक्ति हृदय रोग के भय से यंत्रवत वाक करना शुरू कर देता है , और हर चौथे व्यक्ति को इसके बावजूद भी हार्ट अटैक होता है !कुछ लोग वाक नहीं करते जिसका कारण वे अपने जोड़ों के...
 पोस्ट लेवल : हेल्थ ब्लंडर
सतीश सक्सेना
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अब और न कुछ कह  पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !कुछ लोग बड़े आहिस्ता सेघर के अंदर , आ जाते हैं !चाहे कितना भी दूर रहें ,दिल से न निकाले जाते हैं !ये लोग शांत शीतल जल मेंतूफान उठाकर जाते हैं !सीधे साधे मन पर, गहरे हस्ताक्षर भी कर जाते हैं !कहने...
girish billore
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     भारतीय भाषाई साहित्य अंतरजाल पर जिस तरह विस्तार पा रहा है, उसकी कल्पना हमने हिंदी चिट्ठाकारी के प्रारंभिक दौर में कर ली थी। परंतु बहुत सारी लोगों को हमारा काम बेवकूफी से बढ़कर कुछ नहीं लग रहा था।    कुछ लोग हिंदी चिट्ठाकारी क...
सतीश सक्सेना
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जिससे रिश्ता जुड़ा था जनम जन्म से  द्वार पर आ गए , आज  बारात ले !उनके आने से, सब खुश नुमा हो गया !नाच गानों से , घर भी चहक सा गया !पर यह आँखें मेरी, संग नहीं दे रहीं हँसते हँसते न जाने छलक क्यों रहीं  ?आज बेटी ...
अपर्णा त्रिपाठी
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जाने क्यूं जलते लोग,बुलंदियों के आ जाने परबदल जाते क्यूं रिश्तें, गुरबत के आ जाने परहटे नकाब अनदिखे, उजले चमके चेहरों सेखुल गई सभी बनावटें, तूफां के आ जाने परअरसा हुआ देखे उन्हें, जो रोज मिलने आते थेदिखे नहीं दिया भी तो, अंधेरों के  छा जाने परघर से आंगन खत्म ह...