ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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आज शरद पूर्णिमा है..पूरे सोलह कलाओं के साथ..अमृत वर्षा करेंगे चन्द्रदेव..आधी रात तक गरबा खेला जाएगाआँख-मिचौली भी खेली जा सकती हैहमारे पास बातें फालतू नहीं हैचलिए लिंक की ओर...शरद पूर्णिमा ...क्या क़यामत ढा रही, है शरद की पूर्णिमा।गीत उजले गा रही, है शरद की पूर्णिमा।...
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kuldeep thakur
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ऊट-पटांग दिवस पर आप सभी को सादर अभिवादन...आज हम हैं....प्रस्तुति भी हम ही देंगे...चलिए चलें आज की ताबड़-तोड़ प्रस्तुति देखें....अभी जगजीत की गजलें सुनेंगे ...अंधेरों को मिलेंगे आज ठेंगेये दीपक रात भर यूँ ही जलेंगे जो तोड़े पेड़ से अमरुद मिल कर दरख...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादन-------पालकी एक प्रसिद्ध सवारी है जिसे कहार अपने कंधे पर उठाकर चलते हैं।पालकी शब्द का साहित्यिक विन्यास चलिये पढ़ते हैं हम हमक़दम केइस अंंक में★साभार:यशोदा दी के सहयोग से बहुमूल्य सहयोग से बनी आज की प्रस्तुति★कविता कोश से ली गई कालजयी रचनाएँआ...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनआज रविवार को भाई कुलदीप जी को आना थापर उनका फोन व्यस्त हैरायपुर मे पानी की धूम हैनालियाँ उफान पर है....नदी भी होगीजब नालियों का पानी वहां पहुंचेगाचलिए चलें आज और हमारी पसंदीदा रचना देखेंबरखा ...थिरके पात शाख पर किलकेमेघ मल्हार झूमे खिलकेपवन झकोरे उड़-उड़...
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kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषपाँच दिवस प्रतीक्षित है, इस ब्लॉग के पाँच वर्ष पुरे कर देने के लिए... इसलिए चतुर्थ वर्ष में मेरा यह अंतिम प्रस्तुतीकरण है..इंतजारइतना ऐतबार तो अपनी धड़कनों पर भी हमने न किया ;जितना आपकी बातों पर करते हैं ;इतना इंतज़ार तो अपनी साँसों का भी न क...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल नमस्कार--------आप अपने शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिएक्या करते है?आप भी योग करते हैं क्या?बात जब भी सेहत को  चुस्त-दुरुस्त रखने की हो तो निःसंदेह व्यायाम की श्रेणी के अंतर्गत प्राथमिक सूची में "योग" का नाम सबसे पहले लिया जाता है।चमत्कारिक योगमन,मस्ति...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। हर रोज़ देश पर चिंतन करते हैं हम,संसद में जनप्रतिनिधियों का चरित्र देखते हैं हम,जल-संकट हो या सैकड़ों बच्चों की अकाल मौत,संसद में तो कुछ और ही गूँजता सुनते हैं हम। -रवीन्द्र    आइये अब आपको साहित्य के रसास्वादन हेतु कुछ रचन...
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kuldeep thakur
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।।प्रात:वंदन।।अल्फाज जो उगते, मुरझाते, जलते, बुझते रहते हैं मेरे चारों तरफ,अल्फाज़ जो मेरे गिर्द पतंगों की सूरत उड़ते रहते हैं रात और दिन इन लफ़्ज़ों के किरदार हैं, इनकी शक्लें हैं,रंग रूप भी हैं-- और उम्रें भी!गुलजार 
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kuldeep thakur
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सागर अभिवादनमाह जून समाप्ति की ओरहमारे इस ब्लॉग की सालगिरह करीब ही हैसोच रहे हैं कैसे मनाया जाए सालगिरहअब आप ही बताएँ..4 जुलाई 2019 को है रथयात्राइसी दिन हमारा ब्लॉग शुरु हुआ था4 जुलाई को हमारी पाँचवी साल गिरह होगीजायजा लें हमारे पहले अंक काआज शुभारम्भ.....पांच लिं...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादन----इंसानियत..................................दुनिया के बाज़ार में इंसान खिलौना है।मज़हब सबसे ऊपर इंसानियत बौना है।।बिकता है ईमान चंद कागज़ के टुकड़ों में,दौर मतलबों का, हृदयहीनता बिछौना है। धर्म ही धर्म दिखता है चौराहों पर आजकल,रब के बंदे के लिए अफ़...
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