स्नेहिल अभिवादन-------पम्मी जी की अनुपस्थिति मेंआज की शुरुआत कविश्रेष्ठ मैथिलीशरण गुप्तकी कुछ पंक्तियों के साथ...नर हो, न निराश करो मन कोनिज गौरव का नित ज्ञान रहेहम भी कुछ हैं यह ध्यान रहेमरणोंत्‍तर गुंजित गान रहेसब जाय अभी पर मान रहेकुछ हो न तजो निज साधन कोनर...
 पोस्ट लेवल : 1573