सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषहाँ! हर मुद्दे के जज और मजिस्ट्रेटहोता जाएगा सब-कुछ मटियामेटउकसाओ भाँति-भाँति के अर्थों से फेंटदमन करो कर चेतना काआखेटलेकिन अभी वह सोच ही रहा था कि अब दंग रह गया है.उसके भीतर कोई नन्‍हीं सी घंटी बजी है और उसका यह ख़यालख़ुद ब ख़ुद पहले तक पह...
 पोस्ट लेवल : 1576