स्नेहिल अभिवादन--------किसने मेरी पलकों पे तितलियों के पर रखेआज अपनी आहट भी देर तक सुनाई दी- बशीर बद्रदिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है किस की आहट सुनता हूँ वीराने में -गुलज़ार कालजयी रचना ज़नाब मिर्जा गालिबइस दिल को किसी की आहट की आस रहती है, निगाह को...
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