ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
178
‘किसीराष्ट्र को जिवित रहना है तो नैतिकता, धर्म आस्था पर सवाल नहीं उठाना चाहिये’ राज्य कहता है. सुकरात कहते हैं कि बिना जांचे परखे किसी चीज को ग्रहण नहीं किया जा सकता इसलिये सवाल जरूरी है. सवाल किसी भी व्यवस्था के लिये असुविधजनक हैं और सवाल पुछने वाले को  हमेशा...
अमितेश कुमार
178
भारत रंग महोत्सव का पंद्रहवां संस्करण भी संपन्न हुआ और इस वर्ष इस महोत्सव की चर्चा इसमें खेले गये नाटकों की वज़ह से कम और आमंत्रित पाकिस्तानी नाटकों को बिना किसी वाज़िब वज़ह के रद्द कर देने से हुई जिसमें रानावि की खासी किरकरी भी हुई. इस बार भारंगम में  चार खंड...
अमितेश कुमार
178
अनुरूपा राय की प्रस्तुति ‘एनेक्डाटस एंड एलीगरिज बाई गुलबदन बेगम’ का आलेख चोयती घोष ने लिखा है जो बाबर की पुत्री गुलबदन बेगम  के लेखन के रास्ते मुगल वंश के तीन शासकों बाबर, हुमायुं और अकबर की यात्रा को दिखाता है. उम्र के छठे दशक में अकबर ने उन्हें वह सब लिखने क...
अमितेश कुमार
178
भारंगम में पाकिस्तान से आमंत्रित दोनों प्रस्तुतियों 'मंटोरामा'  और 'कौन है ये गुस्ताख ' को रद्द करने के रा.ना.वि के फ़ैसले में छुपे निहितार्थों की पड़ताल कर रहें हैं अपूर्वानंद.नाटक नहीं होना था, नाटक हुआ। नाटक नहीं होना था भारत रंग महोत्सव में, जहां कायद...
अमितेश कुमार
178
प्रसन्ना का रंगकर्म हमेशा सरोकार से चंचालित होता है. इस बार भारंगम में वे रंगायन मैसूर के साथ फ़्रांसीसी नाटककार मौलियर के नाटक की कन्नड प्रस्तुति लेकर आये हैं. यह प्रस्तुति नव धनाढ्य वर्ग के आचार व्यवहार पर केंद्रित है. इस नव धनाढ्य वर्ग ने शाश्वत मूल्यों का उपहास...
अमितेश कुमार
178
भारंगम में मंटो की जन्मशताब्दी को ध्यान में रखते हुए उन पर आधारित प्रस्तुतियों को विशेष खंड के तहत रखा गया है. इन प्रस्तुतियों की शुरूआत देवेंद्र राज अंकुर निर्देशित प्रस्तुति ‘खोल दो और मोज़ेल’ से. आगे इस खंड में रानावि रंगमंडल का अनूप त्रिवेदी निर्देशित ‘दफ़ा २९२...
अमितेश कुमार
178
तीसवीं शताब्दी बम्बई के नाटकों की खासीयत होती है कि वह दर्शकों का पूरा ध्यान रखती है. नाटक तक लाने और प्रस्तुति के दौरान सीट पर बैठाये रखने का पक्का इंतजाम भी रहता है.  इसमें शामिल है हास्य की पूरी खुराक, चुस्त फ़िकरें और स्टार आकर्षण यानी फ़िल्मी सितारों...
अमितेश कुमार
178
nine days newspaperभारंगम में शुक्रवार(१० जनवरी) का दिन ऐसी प्रस्तुतियों के नाम रहा जो अपने समाज के सच से गहरे जुड़ कर उस वेदना को सामने लाते हैं जिससे समाज अभिशप्त है और उससे बाहर आना चाहता है. इस समाज के लिये अब आजादी के कोई मायने ही नहीं है और वे अब वास्तविक आजा...
अमितेश कुमार
178
अपनी पिछली प्रस्तुतियों अंधा युग, मैकबेथ और समझौता से चर्चा में आए प्रवीण कुमार गुंजन ने एक बार फिर अपने नाटक “ जर्नी फॉर फ्रीडम ” को लेकर भारंगम 2013 में LTG सभागार में अपनी  उपस्थिति दर्ज की.   “समझौता ” नाटक के लिए गुंजन को  महिंद्रा एक्सीलें...
अमितेश कुमार
178
फेलिनी की ख्याति से कौन कलाप्रेमी अवगत नहीं होगा! एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक जिसने अपनी फ़िल्मों से इतालवी नवयथार्थवादी ही नहीं विश्व सिनेमा में भी एक नया अध्याय जोड़ा. यह सोचने में ही दिलचस्प प्रतीत होता है कि किसी निर्देशक की बनाई हुई फ़िल्मों के पात्रों पर केन्द...
 पोस्ट लेवल : १५वां भारंगम 15th BRM italy