ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीष बीते कल 10 जनवरी 2020विश्व हिन्दी दिवस थादिवस क्यों मनाना पड़ा, क्यों मनाना चाहिए यह चिंतन का विषय है। चिंतन का आधार है चेतना..क्या है यह चेतनासँभाला अपने को। दुकान में ग्राहक खड़े हैं।जोर-जोर से मुँह पर पानी के छपाके मारे। "च...
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kuldeep thakur
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सोमवारीय विशेषांक मेंआप सभी का स्नेहिलअभिवादन-------दुआ है कि बद् दुआ उम्रेदराज़ हो जाऊँजीना इतना आसांं भी नहीं क्या मज़ाक हो जाऊँ?★'दुआ' नेक इरादों से की जाने वाली एक पाक ज़ज़्बात है। इंसानी ज़िंदगी की सलामती और जीने की सहूलियत के लिए हम सभी दुआएँ करते और देत...
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kuldeep thakur
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हिमांचल के रुहेड़ी शहर मे बर्फबारी हो रही हैदेखने के लायक , महसूस करने के लायक मौसम होगा...विजली नहीं होगी , मोबाईल भी नहीं होगाबस, बर्फ के गोले बना-बना कर एक दूसरे पर फेकते जाइएभाई कुलदीप के बदले हम हैं आज..कुछ नया होना चाहिए... ज्याति खरेइस धरती परकुछ नयाकुछ...
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kuldeep thakur
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[01-01-2020] आयाम:साहित्य का स्त्री स्वर(व्हाट्सएप्प समूह से ) की अध्यक्ष पद्मश्री, डॉ. उषा किरण खान:- बाबा ने कहा था— नील गगन में यह जो सूरज चमक रहा हैमेरी भी आभा है इसमें!!हम इसे न भूलें कि हम किसी से कम नहीं।जब हम यह नहीं भूलें कि हम किसी से कम नहीं तो...┏━...
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kuldeep thakur
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साल 2020 की पहली शुक्रवारीय प्रस्तुति में आपसभी कास्नेहिल अभिवादन।उठो जाग जाओ क्योंकि कल की अंधेरी रात बीत चुकी...क्योंकि आज का दिन एक नयी सुबह है और इस नयी सुबह का हरपल खूबसूरत और बेशकीमती है इसे अपने कर्मों से नया अर्थ देकर जीवन का अर्थ बदलना सिर्फ़ हमार...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। सन 2020 के द्वितीय दिवस में आपका स्वागत है। रंग-ख़ुशबू, फूल-ओ-फ़ज़ाएँ, हुस्न-ओ-शबाब, प्यार-मुहब्बत से इतर भी कुछ ऊबड़-खाबड़ लिखा जाता है सामाजिक विषमताओं के घने अंधेरों पर!-रवीन्द्र सिंह यादव  &nb...
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Yashoda Agrawal
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सादर नमस्कार...देवी जी घाट की ओरप्रस्थान की तैय्यारियाँ कर रही हैआज हम हैं अपनी पसंदीदा रचनाएँ लेकर...पर्व, प्रगतिशीलता और हमजब मैं कॉलेज के दिनों में थी तब पहली बार नाम सुना था छठ पूजा का. एक दोस्त के घर से आया प्रसाद खाते हुए इसके बारे में थोड़ा बहुत जाना था. नदी...
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kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषउछले कूदेकोलाहल मचायेसोने जा रहेसब रखे ताक पेबेसुध वाली नींदगिले शिकवेस्पर्द्धा सत्यापनीयउजड़े नींदभोर में भिड़ने कोशिद्दत से जीने कोएक मौन हैंसपनों का पुकारनिष्प्रयोजनसंग्राम प्‍यारी नींदनसीब कारस्तानीस्नातक स्तरनहीं भी...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनअब डर सा लगता हैकि आप सब मिलकर मुझेपाँच लिंकों के आनन्द सेनिकाल बाहर न कर देंक्योंकि मेरी पसंदीदारचनाएँ कुछअजीबो-गरीब सीलगने लगी है आप सब कोबहरहाल चलते हैं फिर से अजीबो-गरीब कड़ियों की ओर..प्रतीक माहेश्वरी कथनकाला अँधा सा ये जीवन, कैसा है यह बिका बिका?क...
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ऋता शेखर 'मधु'
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आज हमारे साथ जुड़ रही हैं सुपरिचित हाइकुकार आदरणीया सीमा स्मृति जी...धूप का आना...पंछियों का चहचहाना...इसी विषय पर देखते हैं उनके सुन्दर हाइकु हाइगा की नजर से|हाइकु भेजने के लिए सीमा जी का हार्दिक आभार|सारे चित्र गूगल से साभार