ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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सादर अभिनन्दनव्रती महिलाओँ काउनकी सारी मनोकामना पूर्ण होइसी प्रत्याशा के साथ देखिए आज की रचनाएँप्यास ... पुरुषोत्तम कुमार सिन्हाहुई है, प्यास कैसी ये सजग? है जो, पानी से अलग! घूँट, कितनी ही पी गया मैं! प्यासा! फिर भी, कितना रह गया मैं! तृप्त, क्...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनआज श्री गणेश जी विदा हो रहे हैंछोटे-छोटे बच्चे चिल्ला रहे हैंगणपति बप्पा मोरियाबूढ़ातालाब में बोरिया....बच्चों का बचपना है...हमने तो जी लियाअब उन्हें भी जीने दोचलिये चलें लिंक्स की ओर....माँ की जलती हथेलियाँ :)...... संजय भास्करवर्षो से जलती रही हथेलिया...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन स्वीकारेंपहले रचनाएँ पढ़ेंबातें फिर बाद में...रचनाकार मेंइंटरनेट पर युद्ध की शुरुआत हो चुकी है । कार्पोरेट वार। अपने अपने फायदे के लिए । मजे की बात है कि विरोध की खबर के नीचे समर्थन पाने का विज्ञापन भी छपा है । काव्य सुधा...
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ऋता शेखर 'मधु'
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आज मंच पर हमारे साथ जुड़ रही हैं आदरणीया सरिता भाटिया जी...लेखनी की धनी उत्कृष्ट हाइकुकार का सादर अभिनंदन एवं स्वागत...आइए देखते हैं उनके हाइकु, हाइगा के रूप में| हाइकु भेजने के लिए आभार...!!सारे चित्र गूगल से साभार 
ऋता शेखर 'मधु'
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चैत के महीने में नीम की पत्तियाँ, फूल, फल, छाल आदि का प्रयोग खाने या लगाने के लिए किया जाता है|इससे काफी रोग दूर भाग जाते हैं| यह सबसे अधिक आक्सीजन देने वाला भी पेड़ है अतः इसके नीचे समय बिताने से शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है| इसी आधार पर प्रस्तुत है एक गीत...निमिया...