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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनजनवरी का अंत तुरंतकल से माह फरवरीलेकर आ रहा हैकाफी सारे उत्सवऔर ढ़ेर सा करबजट माह जो हैआज सखि श्वेता नहीं हैसो हमे झेलिए...हंसी-मजाकधूम-धमाके का मौसम सुरु हो गया हैये गलती नही हैसुरूर से सुरु हो गया शुरुचलिए वासंती रचनाओं की ओर...शुरुआत एक गीत से ....
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। आज महात्मा गाँधी जी की पुण्यतिथि है। बापू को हमारा शत-शत नमन। चित्र साभार :गूगलविचारोत्तेजकता का माहात्म्य संवाद की अस्पष्टता के दौर में,निखिल भूमण्डल पर छाये हैं छल-दंभ-झूठ के गर्द-ओ-गुबार।-रवीन्द्र सिंह य...
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।। भोर वंदन।।"फूटा प्रभात‚ फूटा विहान..बह चले रश्मि के प्राण‚ विहग के गान‚ मधुर निर्झर के स्वरझर-झर‚ झर-झर।धीरे-धीरे‚लो‚ फैल चली आलोक रेखधुल गया तिमिर‚ बह गयी निशा;चहुँ ओर देख‚धुल रही विभा‚ विमलाभ कान्तिसस्मित‚ विस्मित‚खुल गये द्वार‚ हँस रही उषा..!!"    &...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनआज हमारी बारीतो चलिए माह जनवरी के अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं हम..आज की कुछ नई-जूनी रचनाओं से साक्षात्कार करेंनेकी की मूर्ति ...विभा रानी श्रीवास्तव 'दंतमुक्ता'"आओ अभी मेरी माँ से उनकी बहू होने के किस्से सुन लो.. जबतक मेरी नानी जीवित रही तभी तक मे...
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सोमवारीय विशेषांक मेंआप सभी का स्नेहिलअभिवादन------चित्र आधारित सृजनजीवन कीसूखी लकड़ी की नोंक में सोयी नन्हीं-सी आशा,जब अंधेरी परिस्तिथियों कीख़ुरदरी ज़मीं से रगड़ाती हैं, पलभर जीने की चाह में संघर्षरत, दामिनी-सी चमककरउजालों की दुनिया सेसाक्षात्कार...
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जय मां हाटेशवरी.....प्राची से झाँक रही ऊषा,कुंकुम-केशर का थाल लिये।हैं सजी खड़ी विटपावलियाँ,सुरभित सुमनों की माल लिये॥गंगा-यमुना की लहरों में,है स्वागत का संगीत नया।गूँजा विहगों के कण्ठों में,है स्वतन्त्रता का गीत नया॥प्रहरी नगराज विहँसता है,गौरव से उन्नत भाल किये।...
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kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषबेवकूफी का सौन्दर्यअपने आस पास का फैला वो यथार्थ।  जिसे आप देखते तो थे मगरउसे उस नजर से देखना चूक गये थे जिस नजर से अनूप शुक्ला उसे देखते हैं।आप अचरज में पड़ जायेंगे। अरे, इसे ऐसे भी सोच सकते हैं क्या, औरफिर पढ़ कर कहेंगे कि हाँ, सोच तो...
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kuldeep thakur
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शुक्रवारीय अंक मेंआप सभी काहार्दिक अभिवादन--------गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीत 'जन गण मन..' को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया। यह गीत सबसे पहले 27 दिसंबर 1911 को कलकत्ता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवे...
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सादर अभिवादन। आज देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है। देश के लाड़ले सपूत को हमारा शत-शत नमन। चित्र साभार :गूगल इस अवसर पर नेताजी को समर्पित मेरी एक पुरानी रचना-            &n...
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।।भोर वंदन।।"शुभ्र आनन्द आकाश पर छा गया,रवि गा गया किरण गीत ।श्वेत शत दल कमल के अमल खुल गये,विहग-कुल-कंठ उपवीत ।चरण की ध्वनि सुनी, सहज शंका गुनी,छिप गये जंतु भयभीत ।बालुका की चुनी पुरलुगी सुरधुनी;हो गये नहाकर प्रीत..!!"-सूर्यकान्त त्रिपाठी निरालाकुछ सहज, साकार...
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