ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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सादर अभिवादन..भूमिका लिखना नहीं आता हमेंतात्कालिक घटनाओं का वर्णन हम भले ही कर दें पर किसी विषय विशेष पर लिखनाअसहज से हो जाते हैं हम...सखी श्वेता लापता हैपर सम्पर्क में है..एक किस्सा याद आ रहा हैकंजूस और उसकी श्रीमति के बीच हुई बात-चीतसूम कहे सूमिन सेकाहे...
 पोस्ट लेवल : 1669 पदचाप
kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी.....दिल्ली के चुनाव समाप्त हो गये.....अब प्रतीक्षा है एक अच्छे दल की जीत की.....इस आज के साथ पेश है....आज के लिये मेरी पसंद.....कविकवि सुन लेता हैवह सब भीजो कहा ही न गया कभीजी लेता है तमाम अनकहे,अलिखित,अपठित गद्यांशों में हीकागज के उपवन देखे ....कृष...
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kuldeep thakur
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बिन कांटों के फूल का चयन किया जा सकता हैशब्दों के कांटों का क्या किया जाएजिन्हें शब्दों के कांटों की आदत हो जातीउन्हें फूल-फलों के कांटों के चुभन अच्छे लगने लगते हैंप्रेम दिवस पर कामना, रहती यह हरबार !देगा अच्छा प्यार से, .प्रेमी फिर उपहार !!बौर होरहामूली गाजर शलजम...
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kuldeep thakur
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शुक्रवारीय अंक आप सभी का स्वागत है।----धर्म हो या अधर्म,कोई भी विचार जब तक स्वविवेक सेन उत्पन्न हुआ हो, तबतक धूलकणों की आँधी मात्र होती है जिसमें कुछ भी सुस्पष्ट नहीं होता है।उधार का ज्ञान किसी भी विषय के अज्ञान को ढक सकता है समाप्त नहीं कर सकता...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। मिथ्या रटते-रटते सच हो सकता है?शिक्षा-नीति में खोट हो तो सकता है।  -रवीन्द्र  आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-  बस यूँ ही...विभा रानी श्रीवास्तव  काश! रिश्तों में आये पतझड़ केपत...
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kuldeep thakur
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।। उषा स्वस्ति।।"बहुत दिनों के बाद खिड़कियाँ खोली हैंओ वासंती पवन हमारे घर आना!जड़े हुए थे ताले सारे कमरों मेंधूल भरे थे आले सारे कमरों मेंउलझन और तनावों के रेशों वालेपुरे हुए थे जले सारे कमरों मेंबहुत दिनों के बाद साँकलें डोली हैंओ वासंती पवन हमारे घर आना!"कुँवर ब...
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kuldeep thakur
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मंगलवारीय प्रस्तुति मेंआप सभी का स्नेहिल अभिवादन------जानलेवा कोरोना वायरस के कहर से आक्रांत है हमारा पड़ोसी देश चीन। चीन के वुहान से फैल रहे कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है। इसके चलते अब तक 350 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 14 हजार से ज्य...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनप्रस्तुत है हम-क़दम काअंक क्रमाक 106 .........सर्वप्रथम वह कालजयी रचना जिस पर आधारित विषय था।सूर्यकान्त त्रिपाठी "निराला"अभी न होगा मेरा अंतमेरे जीवन का यह है जब प्रथम चरण,इसमें कहाँ मृत्यु?है जीवन ही जीवनअभी पड़ा है आगे सारा यौवनस्वर्ण-किर...
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kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी.... पहले 22 जनवरी, फिर 1 फरवरी.....अब एक नयी तिथि को.....निर्भया के दोषियों को फांसी मिलेगी.....फांसी शब्द सुनकर कुछ पल के लिये सारे शरीर में कंपन सी हो जाती है......पर  इनके द्वारा निर्दोष निर्भया के साथ किये  घृणित कृत्य को सोचकर......
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kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषसबका प्यारा मौसम वसंत आ गयाइश्क इज़हारे प्रेम दिवस सीखा गयाकौन रंग फागुन रंगेहोठोंहोठों चुप्पियाँ, आँखों, आँखों बात,गुलमोहर के ख्वाब में, सड़क हँसी कल रात। अनायास टूटे सभी, संयम के प्रतिबन्ध,फागुन लिखे कपोल पर, रस से भीदे छंद। अंखियों से जादू...
 पोस्ट लेवल : 1660