ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। अब हम विकसित देशवासी हो गये हैंविकासशील देश का दर्जा था कभी सारी क़वायद ज़्यादा टैक्स के लिये अरे भाई! नाम दरोगा रखने से लोग कहाँ डरने वाले हैं! -रवीन्द्र   आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की...
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kumarendra singh sengar
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शब्दों की रवानी भी नज़र की शोख़ी मेंछोटी पड़ जाए, दिल की आवाज़, दिल से निकले और सीधे दिल से टकराए. वो एक पल के शतांश में तेरी आँखों का यूँ मटकना, होंठों में लरजन और शब्दों का गुम हो जाना.थाम कर वक़्त की उड़ान को एक झटके में, वक़्त के साथ गुज़रे वक़्त की यात्रा कर आ...
kuldeep thakur
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।। भोर वंदन।।“ भोर का उठना है उपकारी।जीवन-तरु जिससे पाता है हरियाली अति प्यारी।पा अनुपम पानिप तन बनता है बल-संचय-कारी।पुलकित, कुसुमित, सुरभित, हो जाती है जन-उर-क्यारी”हरिऔधसुप्रभातम के साथ अब नजर डालें..सृजनात्मक के विधा से
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kuldeep thakur
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सादर नमस्कारलीजिए काफी अंतराल के पश्चात आज हम हैं..इच्छा तो होती थीपर देवी जी को चलायमान और व्यस्त रखने के लिए हीहम अपनी अनुपस्थिति दर्ज करते आ रहे हैं....आज की रचनाएं कुछ यूँ है ...आदत ...रेवातुम्हें मांगने कीकितनी आदत होगयी है नशीर्ष पर पहुंचनेकी होड़ म...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनकलम और क़लम में फर्क हैमायने में...सोचिएक़लम अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। अज्ञानता से ज्ञान के गलियारों की यात्रा मेंक़लम उजाले की किरण है जो सही राह चुनने मेंमदद करती है।क़लम बुद्धिजीवी है, क़लम की ताकत  ही है जो किसी भी समाज और देश को...
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kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी.....प्यार नि:शब्द है। प्यार अव्यक्त है। प्रेम का गुणगान संत-महात्मा, विद्वान सभी ने किया है। मीरा ने तो प्रेम में हंसते-हंसते ज़हर भी पी लिया। प्यार सुगंध हैऔर प्यार में ही दुनिया के सारे रंग है।सादर अभिवादन.....देखिये मेरी पसंद.....बेटी का सम्मानबेट...
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kuldeep thakur
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औरतों की जेब क्यों नहीं होतीPRIYANKARयह कुसूर सिर्फ़ उनके पहनावे से जुड़ा हुआ नहीं हैन ही इतना भर कहने से काम चलने वाला कि क्योंकि वे औरतें हैंजवाब भले दिखता किसी के पास न हो मगरइस बारे में सोचना ज़रूरी हैजल्दी सोचो!क्या किया जाएदिनों-दिन बदलते ज़माने की तेज़ रफ़्तार के...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन।           आज भारत में पिछले तीन दशक से एक आयातित पर्व 'वेलेंटाइन डे' की धूम है जो एक विशुद्ध बाज़ारवाद की उपज है। नयी पीढ़ी ने ख़ुश होने के बहाने इसे हाथों-हाथ अपना लिया है। हम भी ख़ुश हो लेते हैं ऐसे मौक़ों पर लोगों को ख़...
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kuldeep thakur
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देर रात काव्य गोषठी में व्यस्तभाई रवीन्द्र जी इतने मग्न हुएहमे सूचित भी करना भूल गएसादर अभिवादन..आज की रचनाओं पर एक नज़रकबीला ...गुरुमिन्दर सिंहफटे हालात और ज़र-ज़र ज़िन्दगी,एक ओर कबीला स्थानांतरित हुआ है,दो जून की रोटी के लिए डाला डेरा,ज़ज्बात सिमटते-सिमटते बिखर गये,र...
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kuldeep thakur
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।। भोर वंदन।।"आप ने झूटा वादा कर केआज हमारी उम्र बढ़ा दी " -कैफ़ भोपाली फिर हुई आप की दिल्ली और हमारी दिल्ली सेल के साथ.. मुफ़्त, मुफ़्त और निकल चला मुफ्त का सिलसिला..इसी के साथ आगे बढ़तें हैं आज की लिंकों पर..क्योंकि"अच्छा नहीं है मुफ़्त की सियासत पर शक करना...
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