ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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सादर नमस्कार..आज हम आ गए..हमारी सोच कुछ अलग नहीं है..पर सोच से जरूर ज़रा अलग ही है..सर्व प्रथम शुभकामनाएँ पुरुषोत्तम जी कोउनकी 1101 वीं रचना के लिए...पढ़िएस्पंदन (1101 वीं रचना)अन्तर्मन हुई थी, हलकी सी चुभन! कटते भी कैसे, विछोह के हजार क्षण?हर क्षण, मन की पर्वत...
 पोस्ट लेवल : 168.
kuldeep thakur
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सादर अभिवादन।  अब हम सब जान लें आधार नहीं है निराधार मध्यवर्गीय जनता को राहत देने के लिये सुप्रीम कोर्ट का आभार। आइये आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-माँ ...दिगम्बर नासवा दूध घी पर सबसे पहले नाम होता था मेरारोज़ स...
 पोस्ट लेवल : 1168
kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषनव प्रवाह / धनक का धमक / जीत का ज्वलहिय हर्षित / नीति रीति उज्ज्वल / जीव विह्वलछटा कोहरा / जगी दबी उम्मीदें / आस निहारे स्वप्न धवल / ख्यालों-मुंडेरों सजे / वर्ष नवलदेखो पुराने ये कैलेण्डरहै वक्त की कोई शरारत या गई फ़िर उम्र ढ़लआते...
 पोस्ट लेवल : क्रमांक - 168
ऋता शेखर 'मधु'
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ताँका........विश्व बाल श्रम दिवस पर-१२ जूनबालक रोयाबस्ता चाहिए उसेहै मजबूरदिल किया पत्थरबनाया मजदूर|१|कोमल हाथचुभ गए थे काँचबहना रोईभइया आँसू पोंछेदोनो कचरे बिनें|२|दिल के धनीराजा औ' रंक बच्चेदेख लो फ़र्कएक खरीदे जूतापोलिश करे दूजा|३|गार्गी की बार्बीकमली ललचाई...