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kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी......स्वागत है आप का.....बरसों की आरी हँस रही थीघटनाओं के दाँत नुकीले थेअकस्मात एक पाया टूट गयाआसमान की चौकी पर सेशीशे का सूरज फिसल गयाआँखों में कंकड़ छितरा गएऔर नज़र जख़्मी हो गईकुछ दिखाई नहीं देतादुनिया शायद अब भी बसती है----अमृता प्रीतम  अब...
 पोस्ट लेवल : 1689
kuldeep thakur
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अवश्य पढ़ें पत्रडॉ राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति भवन से अवकाश प्राप्त करने के पश्चात अपना शेष जीवन पटना में बिताया था जो 'सदाकत आश्रम' के नाम से जाना जाता है और गंगा नदी के सामने है। मैं उस भवन की तस्वीर आपलोगों से साझा नही कर सकता हूँ क्योंकि उसे देखकर बहुत ज्यादा ग्...
 पोस्ट लेवल : 1688
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनसखी श्वेता का मनगुम है कहींजाएगी कहांसुबह की भूली हैशाम होने दीजिए...आ जाएगीअगले अंक तकआज की रचनाओ पर एक नज़र...खुल गए जो बंधन कब के ...अनीता जीइक यादों की गठरी है इक सपनों का झोला है, जो इन्हें उतार सकेगा उसमें ही सुख डोला है !जो कृत्...
 पोस्ट लेवल : 1686
kuldeep thakur
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 सादर अभिवादन। नफ़रत से सराबोर हो गयी है फ़ज़ा  अमन के दुश्मन जला रहे हैं बस्तियाँ, असभ्य समाज की मिसाल पेश की है अतिथि दबाते रहे दाँतों तले उँगलियाँ।-रवीन्द्र आइए पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-  स्लीपओवर....विभा रानी श्रीवास्तव ...
 पोस्ट लेवल : 1685
kuldeep thakur
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।। भोर वंदन।।"भावों के आवेग प्रबल मचा रहे उर में हलचलकहते,उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजानतृण,तरु,लता,अनिल,जल-थल कोछा लेंगे हम बनकर गानपर, हूँ विवश,गान से कैसे जग को हाय!जगाऊँ मैंइस तमिस्त्र युग-बीच ज्योति कीकौन रागिनी गाऊँ मैं? " &nbs...
 पोस्ट लेवल : 1685
kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी....मुझे लगता है.....आज देश में दो तरह के ही लोग हैं.....एक वो जो सरकार के पक्ष में बोलते हैं.....दूसरे सरकार के विरोध में.....सत्य बोलने वाले कहीं नजर नहीं आ रहे....ये शायद महाभारत काल सी स्थिति है......जहां एक न एक पक्ष के साथ जाना ही था.....लोकतंत...
 पोस्ट लेवल : 1684
kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनवेदना मूलतः संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ पीड़ा,दर्द,व्यथा इत्यादि है।मनुष्य के मन की भावनाओं में दो भावों की प्रधानता है  सुख और दुख। दुख को नैसर्गिक रुप से बिना किसी कृत्रिमता और छल,कपट के बड़बोले आडंबरों से मुक्त, मानसिक व्य...
 पोस्ट लेवल : वेदना 1683
kuldeep thakur
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 सादर अभिवादन। आदमी पर आदमी के अत्याचार असुरक्षा का मन पर भारी भार,आख़िर हासिल होता क्या उन्हेंक़ानूनी मार सामाजिक तिरस्कार।-रवीन्द्र आज भाई कुलदीप जी के स्थान पर मैं हाज़िर हूँ सद्य प्रकाशित पसंदीदा रचनाओं के साथ। आइए पढ़ते हैं आज की चय...
 पोस्ट लेवल : 1682
kuldeep thakur
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सभी को यथायोग्यप्रणामाशीषइंसानों के लिए जो होते विषधारण करने वाले हैं जगदीशकर देता संज्ञानाशधतूराघुन लगी कविताएँ,जूठन में बची थोड़ी सी सच्चाई,हँसी जिस पर जाले जमे हुए हैं,एक चूहे की लाश, और मेरा साहस,कृतज्ञतावर्षों बाद आज मैं छू रहा हूँ धतूरे का फूलतो छू रहा हूँ अपन...
 पोस्ट लेवल : 1681
kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। शिक्षा को बेधड़क अपनाया सबका जीवन बेहतर करने,न जाने कितने पूर्वाग्रह पाले हैं कि स्त्री-शिक्षा से लगे डरने।  #नारी मुक्ति आंदोलन -रवीन्द्र आइए पढ़ते हैं आज की कुछ पसंदीदा रचनाएँ-उधार बाकी है ...निवेदिता श्रीवास्तव 'निव...
 पोस्ट लेवल : 1680