ब्लॉगसेतु

kuldeep thakur
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।। भोर वंदन।।“सिर्फ़ एक दिन ही उत्सव क्यों?पूरा जीवन ही उत्सवपूर्ण होना चाहिए”- ओशोंफाल्गुनी पर्व के बाद एक अहद..बुराई में अच्छाई ढूंढों तो कोई बात बने..और जादा समय न गवाते हुए नज़र डालें लिंकों पर..✍रचनाकारों के नाम क्रमानुसार पढ़ें...आ०उषा किरण जीआ० संजय कौशिक 'विज...
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kuldeep thakur
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पाँच लिंक परिवार की ओर सेसभी पाठकों कोरंगों के पावन त्योहार परहोलीयाना नमस्कार------रस में तैरते मालपुए,दही भल्लों की चटखारे हैंरंगों की बरसात हो रही,उल्लास में डूबे सारे हैं,हमजोली,हँसी-ठिठोली,टोलियों की मस्ती हो ली, बहाने होली के, मिटे फासले ऐसे भी नज़ारे हैं...
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kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी.....पांच लिंकों का आनंद परिवार की ओर से......आप सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएं.....मै नहीं राधा बनूंगी,मेरी प्रेम कहानी में,किसी और का पति हो,रुक्मिनी की आँख कीकिरकिरी मैं क्यों बनूंगीमै नहीं राधा बनूँगी।मै सीता नहीं बनूँगी,मै अपनी पवित्रता का,प्रम...
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kuldeep thakur
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 बस रोटी के भाप,उबले चाय-दूध के ताप केजलन से ही अंदाजा है..नारी का इंसान होनाउतने जलन से ज्यादा है...प्रत्येक के हिस्सेआ ही जाते हैंकई किस्सेनारीरंगभरी होली हो,फगुनाई टोली हो।प्रेमरस पगी-सी,कोयल की बोली हो।मन का अनुबंध हो,प्रेम का प्रबंध हो।जीवन को परिभाषित,कर...
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kuldeep thakur
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सादरअभिवादन।   कोरोना विषाणु (वायरस) से बचाव के 6 आसान उपाय-1. खांसते-छींकते वक़्त रुमाल / टिसू पेपर का प्रयोग करें। 2. हैंड सेनिटाइज़र (अल्कोहल आधारित विषाणुरोधी द्रव ) का प्रयोग करें।3. संदेह या लक्षणों की स्थिति में अधिकृत सरकारी अस्पताल /केन...
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kuldeep thakur
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।। उषा स्वस्ति ।।हिंसा की भाषा बड़ी सख़्त,बड़ी भारीऔर ऎंठी हुई होती हैमृत शरीरों की तरह..फिर भी कोई इसे न दफ़नाता हैन जलाता है..!!”कुसुम जैनखौफ के बादल हटाकर अब सब सहमे - सहमे निकल रहे.. अच्छा होता जो हिंसा को दफनाने का हुनर आ जाता..एक सुलझे सोच के साथ नज...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। सोशल मीडिया हो गया अब जी का जंजाल,समय गया शाँति गयी हो गया कोई कंगाल। -रवीन्द्र आइए अब आज की पसंदीदा रचनाएँ पढ़ते हैं- ऐसे श‍िक्षकों को तो ‘न‍िष्ठा’ कार्यक्रम या ‘प्रेरणा’ एप भी नहीं सुधार सकते....अलकनंदा सिंह  दरअसल, श‍िक्षको...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादनडाँड़, क्षेपणी, चप्पू, पतवार या पाल से चलने वाली एक प्रकार की छोटी जलयान है। आजकल नावें इंजन से भी चलने लगी हैं और इतनी बड़ी भी बनने लगी हैं कि पोत (जहाज) और नौका (नाव) के बीच भेद करना कठिन हो जाता है। वास्तव में पोत और नौका दोनों...
 पोस्ट लेवल : 1690 हम-क़दम पतवार
Yashoda Agrawal
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सादर अभिवादन..आज-कल ये देखा जा रहा हैलोग आलोचक और समीक्षकबनने की होड़ पर लगे हैंलेखक लिखता हैं..वहअपने मन में उपजे भावों कोअपनी कलम की सियाही कोरे कागजों पर और..उसेसंतुष्टि होती है..खैर लिखता कोई है..औरपढ़ता कोई और है....हमारा काम है कि उन रचनाओं कोआपके स...
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kuldeep thakur
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आज के दिन भारतमाता फूली नहीं समाती, उनकी गोद को धन्य करने भगत सिंह जैसा सपूत जो आँचल में आया था।-*-*-*-सुप्रभातम्चलिए आज हम साहित्य सिंधु कीएक मीठी निर्झरी की कुछ बूँदों काआस्वादन करते हैं।आज पढ़ते हैंजयशंकर प्रसाद जी की कुछ रचनाएँ,आप भी आनंद लीजिए★बीती वि...
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