ब्लॉगसेतु

अमितेश कुमार
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इस बार का भारंगम इक्कीस दिनों तक चला. दिनों की अवधि बढ़ा दिये जाने से प्रस्तुतियों की संख्या नहीं बढ़ी लेकिन भारंगम फैल गया. इन इक्कीस दिनों में भारंगम में नाट्यप्रस्तुतियों के अतिरिक्त परिसर प्रस्तुतियां भी हुईं. एक तो ऐसी भी प्रस्तुति को शामिल किया गया था जो मुख्यत...
अमितेश कुमार
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विभाजन वो ऐतिहासिक घटना है जिसने एक बड़ी आबादी को कभी ना भरने वाला घाव दिया है. इसने दो देशों के बीच एक ऐसी खाई पैदा की है जो नैसर्गिक नहीं है. आवाम के हित में है कि यह खाई भरे और उनके बीच आवाजाही हो लेकिन सियासत के लिये यह उनकी राजनीतिक रोटी सेंकने  वाला मसला...
अमितेश कुमार
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भारंगम  के सत्रहवें दिन मैंने कुछ नहीं देखा और इससे पहले भी कुछ दिनों से नाटक देखने में मन नहीं लग रहा था. देश एक अलग तरह का यथार्थ झेल रहा है. ऐसे समय में जब राज्य सत्ता और उसके साथ खड़े लोग गैर बराबरी, विविधता, और न्याय के लिये उठी सभी आवाजों को देशद्रोही साब...
अमितेश कुमार
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‘पाप से घृणा करो, पापी से नहीं लेकिन पाप क्या है, उसका उद्देश्य क्या है? पाप का जीजिविषा से क्या संबंध है? संदीप भट्टाचार्य निर्देशित प्रस्तुति ‘प्रोताड़क’ एक कलाकृति, उसकी चोरी, एक कलाकार सह कला व्यवसायी की कथा के माध्यम से इन दार्शनिक सवालों को अपने केंद्र में रखत...
 पोस्ट लेवल : 18th BRM 18 भारंगम BRM 2016
अमितेश कुमार
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पोलैंड की प्रस्तुति ‘सोनका’ दिल्ली में प्रदर्शित होने से पहले ही विवाद के घेरे में आ गई थी. भुवनेश्वर, उड़ीसा में चल रहे भारत रंग महोत्सव के उपग्रह संस्करण में प्रदर्शन के दूसरे दिन उड़ीसा के संस्कृति मंत्रालय और संगीत नाटक अकादमी ने इस प्रस्तुति में ‘नग्नता’ खोज लिय...
अमितेश कुमार
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 क्रांति के लिये हिंसा कितना न्यायोचित है? क्रांति के उच्चतम आदर्श की प्राप्ति में हिंसा बाधक है या उसे पाने  के लिये किसी भी हद तक जाना जायज है? भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के समय गांधी और भगत सिंह के तरीकों में या वैश्विक परिदृश्य में बुद्धिजीवियों के बीच य...
अमितेश कुमार
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कभी कभी बिलकुल सादगी से वैसी चीज कही जाती है जो आपके गहरे अदंर उतरती है, आपको विचलित करती है.  ऐसा करते हुए वह ना बोल्ड होने का दिखावा करती है ना दावा. बस, सादा और साफ लहजे में गहरी बात. कथन की यह साफ़गोई मुश्किल से हासिल होता है. इसके लिये तैयारी और चेतना में...
अमितेश कुमार
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‘दोने किखोते’साहित्य प्रेमियों के लिये जाना पहचाना नामहै. स्पेनी उपन्यासकार सर्वान्तिस की बसाई गई दुनिया जिसका नायक हैदोने किखोते.जिसके साथ है उसका घोड़े रोजिनान्तों और सेवकसाचोपांजा.किखोते किताबों की रहस्यमयीदुनिया को ही सच मान लेता है और अपने लिये भी एक काल्पनिकदु...
अमितेश कुमार
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 भारंगम में रंगमंचीय प्रयोगोंको भी पर्याप्त स्पेस दिया जाता रहा है. वैसे रंगमंच की हर प्रस्तुति एक निरंतर प्रयोग ही है लेकिन प्रयोगशीलता का मुख्य आशय वहां हैं जहां प्रदर्शन की परंपरागत तरीकों से अलग रास्ता निकाला जाता है. नये रास्तों की तलाश ही रंग भाषा क...
अमितेश कुमार
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भारंगम के अठाहरवें संस्करण का सबसे कीमती दिन जिसमें आप एक प्रेक्षागृह से निकल कर दूसरे में भाग रहे हैं और हर प्रस्तुति आपमें कुछ जोड़ रही है. कला और कथ्य दोनों ही लिहाजों से. ‘हाउ टु स्किन ए जिराफ़ी’, ‘इतिब्रत्यो कथा’, ‘थेरुकुत्तु’, ‘पिरामस और थिस्बी’और अंत में ‘नोट्...