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sanjiv verma salil
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कृति चर्चा : गीत स्पर्श : दर्द के दरिया में नहाये गीत चर्चाकार - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’*[कृति विवरण: गीत स्पर्श, गीत संकलन, डॉ. पूर्णिमा निगम ‘पूनम’, प्रथम संस्करण २००७, आकार २१.से.मी.  x १३.से.मी., आवरण बहुरंगी पेपरबैक, पृष्ठ १२२, मूल्य १५० रु.,...
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--जिन्दगी में बबाल मत करनाप्यार में कुछ सवाल मत करना--ये जहाँ आग का समन्दर हैतैरने का खयाल मत करना-- बेजुबानों में जान होती हैउनका झटका-हलाल मत करना-- प्रीत का ताल तो अनोखा हैडूबने का मलाल मत करना-- नेक-नीयत से मंजिले मिलतींझूठ से कुछ कमाल मत कर...
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--भावनाओं का अचानक भर गया तालाब हैदेशभक्ति का वतन में आ गया सैलाब है --अब खुशी पसरी हुई दीवारों दर चहके हुएजगमगाती हैं मिनारें सज गयी मेहराब है--मानता लोहा हमारा आज सारा ही जहाँअपने हुनर की देश में कारीगरी नायाब है--देखकर ऐसी बुलन्दी बहुत सदमा है वहाँदुश्मनों...
 पोस्ट लेवल : ‘रूप’ की महताब ग़ज़ल
PRAVEEN GUPTA
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Success Story: आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई के साथ किया काम, चौथे अटेंप्ट में बने IASशुभम ने यूपीएससी सिविल सर्विस का एग्जाम पहली दफा 2015 में दिया था, तब ये प्रारंभिक परीक्षा में पास नहीं हुए थे.आर्थिक से जूझते हुए, संघर्ष के दिनों में भी, उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौत...
 पोस्ट लेवल : 2018 IAS TOPPER SHUBHAM GUPTA
विजय राजबली माथुर
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   Nupur Sharma25-08-2019  at 10:00 AM UPDATE: Break from URDU WALA CHASHMA (@The Wire) - after TWO years of a TRANSFORMATIVE & ENRICHING experience - I’ll be taking a TEMPORARY BREAK.AGENDA:1) At this point in life I feel the need to...
Yashoda Agrawal
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वह कुछ जो विचलित कर रहा था उसी में शांति का आकाश था मेरे लिए। वह कुछ जो अजनबी था चिर जुड़ाव का अहसास था मेरे लिए।  वह कुछ जिसे नकारा जा सकता था पर फिर भी कहीं स्वीकार था मेरे लिए।  वह कुछ जिसे देखना और देखते जाना अपना ही...
 पोस्ट लेवल : मोनिका जैन ‘पंछी’
Yashoda Agrawal
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कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें, सच समझे ‘काँन्वेंट’ सबसे पहले तो यह जानना आवश्यक है कि ये शब्द आखिर आया कहाँ से है, तो आइये प्रकाश डालते हैं।ब्रिटेन में एक कानून था लिव इन रिलेशनशिप बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना। जब साथ में रहते...
sanjiv verma salil
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ॐ डॉ. गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’जन्म: १८.६.१९५५, महापुरा, जयपुर। आत्मज: स्‍व. कृष्‍णप्रिया- स्‍व. वैद्य श्री बलभद्र शर्मा। जीवन संगिनी: श्रीमती ब्रजप्रिया। शिक्षा- स्‍नातकोत्‍तर, विद्या वाचस्‍पति। प्रकाशित: प्रतिज्ञा (कर्ण पर आधारित नाटक), पत्‍थरों का शहर (हिन्‍दी गी...
Yashoda Agrawal
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कहाँ गया तू मेरा लाल।आह! काढ़ ले गया कलेजा आकर के क्यों काल।पुलकित उर में रहा बसेरा।था ललकित लोचन में देरा।खिले फूल सा मुखड़ा तेरा।प्यारे था जीवन-धान मेरा।रोम रोम में प्रेम प्रवाहित होता था सब काल।1।तू था सब घर का उँजियाला।मीठे बचन बोलने वाला।हित-कुसुमित-तरु सुन्दर...
sanjiv verma salil
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रविवार, 28 अप्रैल 2019भारतीय और भारतेतर आचार्यों की दृष्टि में ‘मौलिकता’बलराम अग्रवाल*[प्रस्तुत लेख काव्य के भारतीय और भारतेतर आचार्यों के आलोचना सिद्धांतों पर आधारित है। यहाँ ‘काव्य’ से तात्पर्य साहित्य की समूची भूमि से है, कविता मात्र से नहीं। नाट्य और कथा साहित्...