ब्लॉगसेतु

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भूमिकाशिक्षा और संस्कार से ओत-प्रोतबालकृति ‘खिलता उपवन’         वरिष्ठ लेखक, कवि, दोहा विशेषज्ञ, बाल साहित्यकार डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ के बाल-कविता संग्रह ‘खिलता उपवन’ की भूमिका लिखने के लिए मुझे पाण्डुलिपि...
sanjiv verma salil
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आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ - मानवीय संवेदनाओं के कविआचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी का नाम अंतर्जाल पर हिंदी साहित्य जगत में विशेष रूप से सनातन एवं नवीन छंदों पर किये गए उनके कार्य को लेकर अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, गूगल पर उनका नाम लिखते ही सैकड़ों के संख्या मे...
sanjay krishna
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         सुधा ओम ढींगरा की कहानी ‘काट दो...’ पढ़ते-पढ़ते जब अंत तक पहुंचते हैं कि तब अनायास ही शिवमूर्ति की कहानी ‘अकाल दंड’ की याद ताजा हो जाती है। ‘काट दो’ में रेपिस्ट खुद अपने लिए सजा  मुकर्रर करता है कि उसका अंग काट दिया जा...
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संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला:*मले उषा के गाल पर, सूरज छेड़ गुलालबादल पिचकारी लिए, फगुआ हुआ कमाल.*नीता कहती नैन से, कहे सुनीता-सैन.विनत विनीता चुप नहीं, बोले मीठे बैन.*दोहा ने मोहा दिखा, भाव-भंगिमा खूब.गति-यति-लय को रिझा कर, गया रास में डूब.*रोगी सिय द्वारे खड़ा, है लंकेश बुखार.भिक्षा...
 पोस्ट लेवल : दोहा सलिला 2018 ki laghukathayen
sanjiv verma salil
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नवगीत-दरक न पाऐँ दीवारेंहम में हर एक तीसमारखाॅंकोई नहीं किसी से कम ।हम आपस में उलझ-उलझकरदिखा रहे हैं अपनी दम ।देख छिपकली डर जाते परकहते डरा न सकता यम ।आॅंख के अंधे देख-न देखेंदरक रही हैं दीवारें ।*फूटी आॅंखों नहीं सुहातीहमें, हमारी ही सूरत ।मन ही मन में मनमाफि़कगढ़...
 पोस्ट लेवल : नवगीत 2018 ki laghukathayen
Anupam Rathour
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Classification of SoilStep A . Pass Soil sample through 75 micron sieveMore than 50 % soil sample retained : Coarse Grained Soil.More than 50 % soil sample passing : Fine Grained Soil.Step B. For Coarse Grained Soil.i ) Pass the soil (retained on 75 micro...
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         यदि संयुक्ताक्षर शब्द के अर्थ पर ध्यान दें तो संयुक्त + अक्षर। अर्थात् दो या दो से अधिक अक्षरों के मेल से बने अक्षरों को संयुक्ताक्षर कहते हैं।         देखने में यह आया है कि विद्वानों ने ‘‘क्ष’’ ‘‘त्र...
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संस्मरण(भूख) लगभग 45 साल पुरानी घटना है। उन दिनों नेपाल में मेरा हम-वतन प्रीतम लाल पहाड़ में खच्चर लादने का काम करता था। इनका परिवार भी इनके साथ ही पहाड़ में किराये के झाले (लकड़ी के तख्तों से बना घर) में रहता था।     कुछ दिनों के बाद इनका अपने घर...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण ‘भूख