सायद एही साल का बात है या लास्ट ईयर का. समय पुस्तक मेला का था, इसलिये साल चाहे जो भी हो, हम तब तक दिल्ली से निकाले नहीं गये थे. पुस्तक मेला का तमाम गहमा-गहमी के बीच मेला घूमना अऊर बहुत सा किताब खरीदना त होबे किया, एगो अलग अनुभब ई हुआ कि ब्लॉग के पुराना समय के दोस्त...