ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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सादर अभिवादनमाता रानी का आज तीसरा दिनसारी मनोकामनाएँ पूर्ण कर माताश्रीचलिए रचनाओं की ओर..किसे याद करता था समय ...प्रतिभा कटियारसिर्फ एक पत्ते पररोशनी गिर रही थीसिर्फ एक पत्ता हरा थासिर्फ एक पत्ता हिल रहा थाहौले-हौले हिल रहा थापृथ्वी शांत थीपूरी पृथ्वी शांत थीसिर्फ...
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kuldeep thakur
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सादर अभिनन्दनआज फिर मैं यशोदा....सुबह-सुबह उठ जाती हूँपढ़ने बैठ जाती हूँजो मन में भायाउस पन्नें मेंएक चिप्पी लगा देती हूँवही चिप्पियों वाले पन्नेआपके सामने रख रही हूँ....चिकोटी.....अंशुमाली रस्तोगीबोतल में बंद हवाहवा पर हवा का 'अधिकार' नहीं रहा। हवा अब इंसान के 'नि...
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