ब्लॉगसेतु

4
--कल्पनाएँ डर गयी हैं,भावनाएँ मर गयीं हैं,देख कर परिवेश ऐसा।हो गया क्यों देश ऐसा?? --पक्षियों का चह-चहाना ,लग रहा चीत्कार सा है।षट्पदों का गीत गाना ,आज हा-हा कार सा है।गीत उर में रो रहे हैं,शब्द सारे सो रहे हैं,देख कर परिवेश ऐसा।हो गया...
 पोस्ट लेवल : गीत आज हा-हा कार सा है
ज्योति  देहलीवाल
12
शहद हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। हम लोग कई बार फेरीवालों से भी शहद खरीद लेते है। कई बार वो मिलावटी होता है। फिलहाल तो कई ब्रांडेड कंपनियों के शहद में भी मिलावट पाई गई है। ऐसे में जरूरी है कि हमें पता हो कि घर पर आसानी से असली शुद्ध शहद की पहचान कैसे करे...
Kavita Rawat
189
जब मनुष्य सीखना बन्द कर देता हैतभी वह बूढ़ा होने लगता हैबुढ़ापा मनुष्य के चेहरे पर उतनी झुरियाँ नहीं  जितनी उसके मन पर डाल देता हैअनुभव से बुद्धिमत्ता और कष्ट से अनुभव प्राप्त होता हैबुद्धिमान दूसरों की लेकिन मूर्ख अपनी हानि से सीखता हैजिसे सहन करना कठिन था...
Yashoda Agrawal
3
रंगों का मौसम पतंगों का मौसम तिल-गुड़ की सौंधी मिठास का मौसम लो शुरू हुआ नया साल  ।१।मौसम का मिज़ाज बदलाहवा का अन्दाज़ और बदली सूर्य की...
jaikrishnarai tushar
19
 चित्र -साभार गूगल एक ताजा ग़ज़ल-मौसम का सच छिपाती हैं शीशे की खिड़कियाँमौसम का सच छिपाती हैं शीशे की खिड़कियाँहँसकर के सारे ग़म को भुलाती हैं लड़कियाँखतरा सभी को रहता है यूँ अपने आस-पास जब भी कटी उँगलियाँ, तो थीं अपनी खुरपियाँमिलती है गालियाँ उन्हें ईनाम कम मि...
अभिलाषा चौहान
83
..............................
 पोस्ट लेवल : नवगीत
4
--छाँव वही धूप वही,दुल्हिन का रूप वही,उपवन मुस्काया है। नया-गीत आया है।। --सुबह वही शाम वही, श्याम और राम वही,रबड़-छन्द भाया है। नया-गीत आया है।। --बिम्ब नये व्यथा वही, पात्र नये कथा वही,  माथा चकराया है। नया-गीत आया है।...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
226
उस शहर के पश्चिमी छोर पर  एक पहाड़ को काटकर रेल पटरी निकाली गई नाम नैरो-गेज़ धुआँ छोड़ती छुकछुक करती रूकती-चलती छोटी रेल सस्ते में सफ़र कराती अविकसित इलाक़ों में जाती तीस साल उपरांत पुनः जाना हुआ न पटरी थी न पह...
अमितेश कुमार
172
हिंदी प्रदेश में रंगमंचीय गतिविधियां भौतिक स्पेस में संचालित होने लगी हैं. गत वर्ष रंगमंच के लिए मुश्किल भरा रहा. तालाबंदी ने प्रदर्शन और पूर्वाभ्यास दोनों ही को प्रभावित किया. भौतिक स्पेस का विकल्प आभासी माध्यम मे तलाशा गया. कुछ निर्देशकों ने ऐसी प्रस्तुतियां तैय...
jaikrishnarai tushar
19
चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -गमले को बोन्साई  का बाज़ार चाहिए गमले को बोन्साई का बाज़ार चाहिए जब धूप लगे पेड़ सायादार चाहिए घर भी बना तो उसको कहाँ चैन मिल सका तख्ती पे लिक्खा था किराएदार चाहिए विक्रम सा राजा हो तभी नवरत्न चाहिए राज...