ब्लॉगसेतु

संतोष त्रिवेदी
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पिछले कई दिनों से ‘घरबंदी’ में हूँ।घर से बाहर निकलना तो दूर,बॉलकनी तक से झाँकने में डर लगता है।कहीं मुआ वायरस हवा में ही न दबोच ले ! इस अदृश्य दुश्मन का ख़ौफ़ है ही ऐसा कि फ़ोन से भी बात करते समय तीन फ़ीट की दूरी रखता हूँ।यहाँ तक कि डर के मारे सोशल मीडिया में नहीं...
jaikrishnarai tushar
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माननीय श्री नरेंद्र मोदी जीयशस्वी प्रधानमन्त्री ,भारत सरकार विशेष -आज मेरा यह गीत माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दीप प्रज्ज्वलन के आह्वान को समर्पित है |यह गीत उन योद्धाओं को भी समर्पित है जो चिकित्सक ,पुलिस या किसी रूप में इस जंग में शामिल हैं |...
kuldeep thakur
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जय मां हाटेशवरी.....भरी दुपहरी में अंधियारासूरज परछाई से हाराअंतरतम का नेह निचोड़ें-बुझी हुई बाती सुलगाएँ।आओ फिर से दिया जलाएँ माननीय प्रधान मंत्री श्री मोदी जी   ने  एक वीडियो संदेश के माध्यम से  लोगों से अपील की है कि 5 अप्रैल यानी आज&nbs...
 पोस्ट लेवल : 1724
Yashoda Agrawal
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अब तुम कही भी नही होकही भी नहीना मेरी यादों मेंन मेरी बातों मेंअब मैं मसरूफ रहती हूँदाल के कंकड़ चुन'ने मेंशर्ट के दाग धोने मेंक्यारी में टमाटर बोने मेंएक पल भी मेराकभी खाली नही होताजो तुझे याद करूँया तुझे महसूस करूमैंने छोड़ दिएनावेल पढनेमैंने छोड़ दिए हैकिस्से गढ़नेअ...
विवेक अग्रवाल
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एक डॉन - 45 नाम - गनतंत्र की बात 001जानिए किस अंडरवर्&#...
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--खोटी जब तकदीर हो, खोटी हों तकरीर।कठमुल्लाओं की पड़ी, खतरे में जागीर।।--नहीं चलेगी मौलवी, मुल्लाओं की घात।शैतानों की देश में, बिगड़ रही औकात।।--देशद्रोह जो कर रहे, कुछ मुल्लाह-इमाम।उनकी सारी सम्पदा, कर दो अब नीलाम।।--नहीं मिलेगी हाट में, इन्सानियत-तमीज।बाँध ल...
 पोस्ट लेवल : दोहे मुल्लाओं की घात
kumarendra singh sengar
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इस समय लॉकडाउन, कोरोना सभी के दिमाग पर हावी है. आपके भी, हमारे भी, बच्चों के, बड़ों के, जिसे देखो वो यही बातें करता नजर आ रहा है. इस लॉकडाउन में कुछ लोग अपने समय का सदुपयोग कर ले रहे हैं, कुछ लोग अभी भी उसी पुरानी दिनचर्या के साथ बंधे अपने गिन काट रहे हैं. लॉकडाउन न...
समीर लाल
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कायल एक ऐसी विकट और विराट चीज है जो कोई भी हो सकता है, कभी भी हो सकता है, किसी भी बात से हो सकता है और किसी पर भी हो सकता है.मैने देखा है कि कोई किसी की आवाज का कायल हो जाता है, कोई किसी की सुन्दरता का, कोई किसी के लेखन का, कोई किसी के स्वभाव का, कोई किसी के नेतृत्...
अनंत विजय
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जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना संकट से निबटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की तो उसके दो दिन बाद ही लोग अपने अपने घर या यों कहें कि अपने अपने गांव जाने के लिए निकल पड़े। हर कोई संकट के इस समय अपने अपने स्थान पर लौट जाना चाहता था। बड़ी संख्या में लोगों...
सुमन कपूर
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आज बहुत दिन ऑफिस जाना हुआ आज मिली फिर तुमसेबैठी कुछ देर तुम संगकी दो चार बातें खूब चहक रही तुम लाल पीले फूलों संग बोटल-ब्रस भीझूम रहा था लाली से गुलाब और चमेलीमहक रहे थे शान सेनहीं था भय तुम्हें किसी संक्रमण काप्रकृति को खुद में समायेल...