ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है जीवित रहती घास असंभव कुछ नहीं होता गुड़ज़िंदगी की डोर ऊपर वाले के हाथ में सूरज और चाँद हवाओं में उड़ती जिज्ञासाएँपानी की क़िल्लत बसंत में बौर जे. स्वामीनाथन की कविताएँ मास्क, मैरिज और लॉ...
kumarendra singh sengar
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क्या हम लोग गाँवों की तरफ लौटना पसंद करेंगे? क्या हम शहर की भौतिकतावादी ज़िन्दगी को आज तक जीने के बाद अब गाँव में जीवन बिताना स्वीकार करेंगे? ऐसे और भी सवाल उस समय भी उठे थे जबकि चीनी वायरस कोरोना के चलते लगाये गए लॉकडाउन में मजदूरों की, श्रमिकों की वापसी गाँव के लि...
जेन्नी  शबनम
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मेरी पुस्तक 'लम्हों का सफ़र' जो मेरा प्रथम एकल कविता-संग्रह है, का लोकार्पण 7. 1. 2020 को विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में संपन्न हुआ। आदरणीय रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' जी, केन्द्रीय विद्यालय से अवकाशप्राप्त प्राचार्य और साहित्यकार हैं, पुस्तक के लोकार्पण में शामिल न ह...
sanjiv verma salil
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सम्माननीय काव्य गुरु आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' अमरेंद्र नारायण [भूतपूर्व महासचिव एशिया पैसिफिक टेलीकौम्युनिटी शुभा आशीर्वाद, १०५५, रिज रोड, साउथ सिविल लाइन्स ,जबलपुर ४८२००१ मध्य प्रदेश दूरभाष +९१ ७६१ २६० ४६०० ई मेल amarnar@gmail.com] * आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी...
sanjiv verma salil
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कार्यशाला: रचना-प्रति रचना घनाक्षरी फेसबुक * गुरु सक्सेना नरसिंहपुर मध्य प्रदेश * चमक-दमक साज-सज्जा मुख-मंडल पै तड़क-भड़क भी विशेष होना चाहिए। आत्म प्रचार की क्रिकेट का हो बल्लेबाज लिस्ट कार्यक्रमों वाली पेश होना चाहिए।। मछली फँसानेवाले काँटे जैसी शब्दावली हीरो...
sanjiv verma salil
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कल और आज: घनाक्षरी कल : कज्जल के कूट पर दीप शिखा सोती है कि, श्याम घन मंडल मे दामिनी की धारा है । भामिनी के अंक में कलाधर की कोर है कि, राहु के कबंध पै कराल केतु तारा है । शंकर कसौटी पर कंचन की लीक है कि, तेज ने तिमिर के हिये मे तीर मारा है । काली पाटियों के बीच म...
 पोस्ट लेवल : घनाक्षरी
sanjiv verma salil
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लघु कथा विजय दिवस * करगिल विजय की वर्षगाँठ को विजय दिवस के रूप में मनाये जाने की खबर पाकर एक मित्र बोले- 'क्या चोर या बदमाश को घर से निकाल बाहर करना विजय कहलाता है?' ''पड़ोसियों को अपने घर से निकल बाहर करने के लिए देश-हितों की उपेक्षा, सीमाओं की अनदेखी, राजनैतिक...
sanjiv verma salil
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एक बहर दो ग़ज़लें बहर - २१२२ २१२२ २१२ छन्द- महापौराणिक जातीय, पीयूषवर्ष छंद * १. महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश * बस दिखावे की तुम्हारी प्रीत है ये भला कोई वफ़ा की रीत है * साथ बस दो चार पल का है यहाँ फिर जुदा हो जाए मन का मीत है * ज़िंदगी की असलियत है सिर्फ़ ये चार दिन में...
sanjiv verma salil
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ॐ छंद सलिला: त्रिभंगी छंद संजीव * छंद-लक्षण: जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १०-८-८-६, पदांत गुरु, चौकल में पयोधर (लघु गुरु लघु / जगण) निषेध। लक्षण छंद: रच छंद त्रिभंगी / रस अनुषंगी / जन-मन संगी / कलम सदा दस आठ आठ छह / यति गति मति सह / गुरु पदांत...
समीर लाल
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Ingredient:Poha (Beated Rice) – 2 CupYogurt – 3 SpoonBesan (Gram Flour) – 2 SpoonTurmeric Powder – 1 /2 Tea SpoonKasoori Methi (Fenugreek Leaves) – 1 /2 SpoonRed Chili flakes – 1 /2 SpoonCoriander Powder – 1 /2 SpoonCumin Powder – 1 /2 SpoonSalt – 1 /2 SpoonSugar –...