ब्लॉगसेतु

girish billore
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 पोस्ट लेवल : भर्ती बैठक आंगनवाडी
sangeeta swarup
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अंतस की गहराई सेजब आह निकलती हैविलपत हो शब्दों मेंतब वो रचना बनती है .शब्दों को यूँ बाँध - बाँध करमन को बांधा करते हैंअश्कों के सागर पर भीयूँ बाँध बनाया करते हैं.बंध जाता है बाँध जबसागर में गोता खाते हैंडूब - डूब कर एहसासों केमोती लाया करते हैं .मुट्ठी भर - भर कर ज...
अविनाश वाचस्पति
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दिल्‍ली मेट्रोमार्ग की खुदकुशीपेज चार पर पढि़ए या नीचे उतरियेhttp://119.82.71.95/haribhumi/epapermain.aspxभारत की राजधानी दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम होने वाले हैं जबकि सब जानते हैं कि इनसे आम आदमी की किसी भी प्रकार की सेहत दुरुस्त नहीं होने वाली है। परेशानियां भरपू...
संजीव तिवारी
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प्रदेश के गठन के पूर्व परिदृश्‍य में छत्‍तीसगढ का नाम आते ही देश के अन्‍य भागों में रह रहे लोगों के मन में छत्‍तीसगढ की जो छवि प्रस्‍तुत होती थी उसमें बस्‍तर अंचल के जंगलों से भरी दुर्गम व आदिम दुनिया प्रमुख रूप से नजर आती थी। अंग्रेजों के समय से देशी-विदेशी फोटोग्...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  मुझे तो अपने ही ऊपर तरस आ रही थी। कैसे यह सब सुनकर भी मैं उसके लिए कुछ खास नहीं कर पाया था। बेचारी कितनी हिम्मत करके आयी होगी अपना दुखड़ा सुनाने...। मैं अपने बॉस के पास उनके चैम्बर में बैठा कुछ सरकारी कामकाज पर विचार-विमर्श में तल्लीन था। मई का महीना... बाह...
संजीव तिवारी
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प्रदेश के गठन के पूर्व परिदृश्‍य में छत्‍तीसगढ का नाम आते ही देश के अन्‍य भागों में रह रहे लोगों के मन में छत्‍तीसगढ की जो छवि प्रस्‍तुत होती थी उसमें बस्‍तर अंचल के जंगलों से भरी दुर्गम व आदिम दुनिया प्रमुख रूप से नजर आती थी। अंग्रेजों के समय से देशी-विदेशी फोटोग्...
हिमांशु पाण्डेय
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अगणित जन्मों की ले दारुण कर्मश्रृंखलायें मधुकरजब जो भी दीखता उसी से व्याकुल पूछ रहा निर्झरउसका कौन पता बतलाये नाम रुप गति अकथ कथाटेर रहा करुणासाध्या मुरली तेरा मुरलीधर।।66।।क्या कण कण वासी अनन्त का अन्वेषण संभव मधुकरस्वयं भावना समझ करुण वह पास उतर आता निर्झरच...
महेश कुमार वर्मा
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तीन भिखारी   हाथ में कटोरा लिए आधा कपड़ा फटे हुए आधा तन उघड़े हुए एक हाथ में लाठी लिए झुकी कमर से चल रहे लोगों से हैं कह रहे दे दो बाबू दे दो इस बुढ़े को दे दो तू एक पैसे देगा वो दस लाख देगा दे दो बाबू दे दो दे दो बाबू दे दो उसे देख कई चलने वाले सिक...
अविनाश वाचस्पति
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सुधा ओम ढींगरा जी की नई कवितापापा,मैं आप ही का प्रतिबिम्ब हूँ!बलात्कार से पीड़ित कोई बाला होया सवर्णों से पिटा कोई दलित,टी.वी चैनल्स में दिल दहलाती कोई खबर हो याअख़बारों के पन्नों परअंगारे बरसाते समाचार,मेरा खून उसी तरह खौलता है,जैसे आप भड़कते थे.पापा,नेताओं के घिन...
संजीव तिवारी
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कल प्रकाशित मेरे पोस्‍ट जाके नख अरू जटा बिसाला, सोई तापस परसिद्ध कलि‍काला में मेरे फीड ब्‍लाग रीडर श्री सत्‍येन्‍द्र तिवारी जी नें मेल से टिप्‍पणी की है. टिप्‍पणी में उन्‍होंनें ब्‍लाग के संबंध अपनी राय प्रकट की है. आप क्‍या सोंचते हैं इस संबंध में -  Srcid=75...
 पोस्ट लेवल : सत्‍येन्‍द्र