ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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स्नेहाभिवादन !आज के "सांध्य दैनिक मुखरित मौन" संकलन में आप सबका हार्दिक स्वागत ।इस सप्ताह एक ही दिन स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का पर्व है अतः अग्रिम हार्दिक शुभेच्छाएँ ।आज के चयनित सूत्र.. आप सब के अवलोकनार्थ--हसरतों की इमलियाँ ....  नीरज गोस्वामीहसरतों की इ...
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kuldeep thakur
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।।भोर वंदन।।ये आज है...कल थक कर बिखर गया हैजैसे थक जाती है रातऔर कई आकाश गंगाएं ओढ़ कर सो जाती है।एक तकिया चाँद का सिरहाने रखसपनों पर रखती है सिर..और सुबह की रूई गरमाकरबिनौलों संग उड़ जाती है दूर दिशाओं के देश में...अपर्णा भटनागरहाँ.. ये आज है..कल गुज़र गई, नई बातें...
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kuldeep thakur
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स्नेहिल अभिवादन...-------मन या तन की पीड़ा में अंतस से निकली कराह वेदना कहलाती है।वेदना के विषय म़े मेरे लिखने लयक कुछ बचा नहीं हैहमारे सम्माननीय रचनाकारों के द्वाराविषय पर अद्भुत रचनाएँ लिखी गयी है।हर बार किसी भी विषय परसृजनशील क़लमकारों के द्वाराबस क़माल ही लिख जाता...
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kuldeep thakur
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यथायोग्य सभी कोप्रणामाशीषजहाँ संस्कार में जहर है घुलावहाँ दूध ढूँढ़ रहे दूध का धुलाबदल देना तुम जितना बदल सकोशह हो चुकी है तुम ना दहल सको‘इच्छा’, ‘वासना’, ‘कामना’, ’त्याग तो सही’'पिपासा'/'तृष्णा से बच’  दूर भाग तो सही'बुझालो अपनी पिपासापपीहा : एक पक्षी होत...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। खाँचों में बँटता देश यह मेरा वह तेरा प्रदेश क्षेत्रवाद की कुंठा का हो रहा विस्तार राष्ट्रीयता का भाव हो रहा तार-तार। आइये अब आपको ले चलते हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर -कविव...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादन....तीसरी वर्षगाँठ के नजदीक हैं हमरथ-यात्रा का पर्व बस समझिए आ ही गयाकोई बादल नहीं...और बरसात भी नहींऐसे में नेट काम न करे...हिमांचल का रास्ता जिओ को शायद नहीं पताचलिए चलें आज की पसंदीदा रचनाओँ की ओर....हरी में नित मन जो विभोर है...सन्नाटे में भी यहाँ श...
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kuldeep thakur
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सादर अभिवादनरामनवमीजन्म हुआ था आजभगवान श्रीराम काप्रणाम करते हैं उनकोआप भी करिए न...बस ...निहारे ही जा रहे हैं...श्रीराम कोआज की मिली-जुली रचनाएँ............एहसास...श्वेता सिन्हाएक अनजानी कशिशखींचती है अपनी ओरएकान्त को भर देती हैमहकती रोशनी सेऔर मैं विलीन हो जाती ह...
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kuldeep thakur
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मैं सोच-सोचकर परेशान हूँ आखिर उन ३-४-५ साल की मासूम बच्चियों ने कैसे भड़काऊ वस्त्र पहने होगें, जो अमानवीय कृत्य का शिकार हो गयीं।  कैसी अदाएँ दिखायी होंगी जो किसी को वासानात्मक रुप से उकसा गयी। जिनको लड़की या लड़का का मतलब भी नहीं पता वो...
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kuldeep thakur
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आश्चर्य हो रहा है स्वयं पर ,ऐसा कैसे हो सकता है ? कि जो माला साल भर घुमाई, घड़ी आने पर टूट गई। वर्ष भर की सरकारी मेहनत ,जागरूकता अभियान ,अभिनेताओं का मेहनताना ,पोस्टरों पर हुए खर्च ,जनता की रैलियां बड़े -बड़े वादे सभी ठन्डे बस्ते में चले गए। और तो...
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kuldeep thakur
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सादर नमस्कार....तेरस गयागई चौदस भीचली गई...अमावस की रात भीखा लिए भोग छप्पन..हो गई दिल की बातप्यारी बहनों से.........याद आ रही है...महामना हरिवंश राय बच्चन की कुछ पंक्तियाँना दिवाली होती, और ना पठाखे बजतेना ईद की अलामत, ना बकरे शहीद होतेतू भी इन्सान होता, मैं भ...
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